केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत ओडिशा को 3,323 करोड़ रुपए का अनुदान आवंटित किया

केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत ओडिशा को 3,323 करोड़ रुपए का अनुदान आवंटित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर में नल का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के सपने को पूरा करने के लिए, केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 में जल जीवन मिशन के तहत ओडिशा के केंद्रीय अनुदान को बढ़ाकर 3,323.42 करोड़ रुपये कर दिया है, जो 2020-21 में 812.15 करोड़ रुपये था। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आवंटन में इस चार गुना वृद्धि को मंजूरी देते हुए मार्च, 2024 तक ओडिशा के हर ग्रामीण घर में नल के पानी की आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए राज्य को पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया है।

2019 में मिशन की शुरुआत में, देश के कुल 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17%) के पास नल के पानी की आपूर्ति थी। पिछले 22 महीनों के दौरान, कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन व्यवधानों के बावजूद, जल जीवन मिशन को तेजी से लागू किया गया है और 4.5 करोड़ परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। कवरेज में 23.5% की वृद्धि के साथ, वर्तमान में देश भर में 7.69 करोड़ (40.6%) ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति हो रही है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पुडुच्चेरी ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100% घरेलू कनेक्शन का लक्ष्य हासिल कर लिया है और वहां ‘हर घर जल’ का सपना साकार हो गया है। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत का पालन करते हुए मिशन का आदर्श वाक्य ‘कोई भी छूटे ना’ है और लक्ष्य है कि हर गांव के हर घर में नल का पानी उपलब्ध कराया जाए। वर्तमान में 69 जिलों और 99 हजार से अधिक गांवों में हर घर में नल का पानी उपलब्ध है।

15 अगस्त 2019 को, जल जीवन मिशन के शुभारंभ के समय केवल 3.10 लाख (3.63%) घरों में नल के पानी की आपूर्ति थी। इसके बाद से राज्य में 22.84 लाख घरों को नल के पानी के कनेक्शन दिए गए हैं। इस तरह से ओडिशा में 85.66 लाख घरों में से, अब 25.95 लाख घरों (30.3%) को नल के पानी के कनेक्शन प्रदान कर दिए गए हैं। 2021-22 में 21.31 लाख घरों में नल के पानी के कनेक्शन, 2022-23 में 22.53 लाख नल के पानी के कनेक्शन और 2023-24 में 18.87 लाख नल के पानी के कनेक्शन प्रदान करने की योजना बनाई है ताकि हर ग्रामीण परिवार के लिए नल का पानी की आपूर्ति का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे अपने पत्र में कहा कि नल के पानी का कनेक्शन प्रदान करने का काम सभी गांवों में शुरू किया जाना चाहिए ताकि मार्च 2024 तक राज्य के हर घर में नल के पानी के कनेक्शन की सुविधा मौजूद हो।

वर्ष 2021-22 के लिए वार्षिक योजना के कार्यान्वयन में ओडिशा की मदद के लिए केंद्रीय आवंटन चार गुना बढ़ा दिया गया है। 10.93 करोड़ रुपए की बची हुई राशि और राज्य के 3,253 करोड़ रुपये के बराबरी के योगदान से साथ राज्य में 2021-22 के लिए जलापूर्ति कार्य के लिए जल जीवन मिशन के तहत कुल 6,596 करोड़ रुपये का परिव्यय उपलब्ध है। इस प्रकार, कार्यान्वयन की गति में तेजी लाने के लिए पर्याप्त निधि की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है।

2021-22 में, ओडिशा को, ग्रामीण स्थानीय निकायों/पीआरआई को पानी और स्वच्छता के लिए 15वें वित्त आयोग से संबद्ध अनुदान के रूप में 1,002 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। अगले पांच साल यानी 2025-26 तक 5,280 करोड़ रुपये की निधि सुनिश्चित है। ओडिशा के ग्रामीण क्षेत्रों में इस विशाल निवेश से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

देश में स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को सुरक्षित नल का पानी सुनिश्चित करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 दिनों के अभियान की घोषणा की थी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दो अक्टूबर 2020 को इसका शुभारंभ किया था। परिणामस्वरूप, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे राज्यों/ केंद्र शासित क्षेत्रों ने स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में नल के पानी की व्यवस्था की। ओडिशा में 25,820 स्कूलों (47%) और 11,913 आंगनवाड़ी केंद्रों (22%) के पास नल के पानी की आपूर्ति है। केंद्र सरकार ने राज्य सेबच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर स्वच्छता की खातिर अगले कुछ महीने में सभी बचे हुए स्कूलों, आश्रमशालाओं, आंगनवाड़ी केंद्रों और साथ ही पीएचसी/सीएचसी, जीपी इमारतों, सामुदायिक केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों आदि में सुरक्षित नल के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

राज्य को पानी की कमी वाले क्षेत्रों, गुणवत्ता प्रभावित गांवों, आकांक्षी जिलों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों और सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) गांवों में घरों में नल का पानी उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने की भी जरूरत है।

जल गुणवत्ता निगरानी और निगरानी गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं,स्वयं सहायता समूह के सदस्यों, पीआरआई सदस्यों, स्कूल शिक्षकों आदि को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का उपयोग करके संदूषण के लिए पानी के नमूनों का परीक्षण कर सकें। कुल 77 प्रयोगशालाओं में से केवल छह प्रयोगशाला ही एनएबीएल से मान्यता प्राप्त है। राज्य को इन जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन और एनएबीएल मान्यता हासिल करने में तेजी लाने की जरूरत है। ये प्रयोगशालाएं जनता के लिए खुली होनी चाहिए ताकि वे नाममात्र की लागत पर अपने पानी के नमूनों की जांच करा सकें।

जल जीवन मिशन एक ‘नीचे से ऊपर की ओर बढ़ने’ का एक दृष्टिकोण है जहां योजना से लेकर कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव तक समुदाय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे हासिल करने के लिए, राज्य सरकार को ग्राम जल और स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/ पानी समिति को मजबूत करने, अगले पांच वर्षों के लिए ग्राम कार्य योजना विकसित करने, कार्यान्वयन राज्य एजेंसियों (आईएसए) को ग्राम समुदायों को संभालने और समर्थन करने, लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए सहायता गतिविधियां शुरू करनी होंगी। अब तक ओडिशा में 47,412 गांवों में से केवल 1,184 गांवों में ही वीडब्ल्यूएससी या पानी समितियां हैं।

इन उपयोगकर्ता समूहों की ग्राम स्तर की योजना, कार्यान्वयन, पांच साल की ग्राम कार्य योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका है, जो हर घर में सुनिश्चित जल आपूर्ति के लिए जल आपूर्ति प्रणालियों के दीर्घकालिक स्थायित्व और नियमित संचालन एवं रखरखाव को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खासकर पश्चिमी ओडिशा के पानी की कमी वाले इलाकों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

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