दक्षिण पश्चिम मॉनसून पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आगे बढ़ा

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उत्तरी बंगाल की खाड़ी और आस-पास के क्षेत्र में 19 जून के करीब एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र/क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के अनुसार: ♦दक्षिण पश्चिम मॉनसून पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। ♦मॉनसून की उत्तरी सीमा(एनएलएम) अब कांडला, अहमदाबाद, इंदौर, रायसेन, खजुराहो, फतेहपुर और बहराइच से होकर गुजरती है। ♦एक चक्रवाती परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और इसके आस-पास के क्षेत्र में स्थित…

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हरियाणा में जल जीवन मिशन का तेज़ी से कार्यान्वयन, हर घर नल से जल का लक्ष्य साल 2022 मैं ही पूरा होगा

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केंद्रीय मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार, श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कोविड-19 के कुशल प्रबंधन के लिए हरियाणा शासन-प्रशासन के उल्लेखनीय प्रदर्शन की सराहना करते हुए समस्त हरियाणा वासियों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की व जल जीवन मिशन अभियान का लक्ष्य साल 2021-22 तक ही पूरा करने के निर्णय हेतु खुशी ज़ाहिर की, साथ ही हरियाणा को केंद्रीय सहायता हेतु अपनी प्रतिबधता ज़ाहिर की। वर्ष 2019-20 के दौरान हरियाणा के लिए आवंटित राशि को 149.95 करोड़ रुपए से बढाकर 289.51 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस प्रकार…

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10000 एफपीओ का गठन और ई-नाम प्‍लेटफॉर्म को मजबूत बनाना लघु कृषक कृषि व्‍यापार संघ (एसएफएसी)का दायित्‍व

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एसएफएसी की 24वीं प्रबंधन बोर्ड व 19वीं वार्षिक जनरल बोर्ड की बैठकों को सम्‍बोधित करते हुए श्री तोमर ने 1000 मंडियों को ई-नाम से जोड़े जाने की सराहना की; 1.66 करोड़ से ज्यादा किसान, 1.30 लाख से अधिक व्यापारी ई-नाम के साथ पंजीकृत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 10 हजार किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन की घोषणा के अत्यंत महत्वपूर्ण कदम सहित कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार किए हैं।…

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कृषि-पारिस्थितिकी एवं प्राकृतिक खेती भारत में समावेशी आर्थिक विकास को गति दे सकते हैं

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नीति आयोग द्वारा 29 मई को आयोजित एक सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भारत में कृषि-पारिस्थितिकी और प्राकृतिक खेती के दृष्टिकोण को पर्याप्‍त रूप से बढ़ावा देने के प्रयासों का समर्थन किया। वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के समक्ष अपने विचार प्रस्‍तुत करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने कहा, “प्राकृतिक खेती गोबर और मूत्र, बायोमास, गीली घास और मृदा वातन पर आधारित हमारी स्‍वदेशी प्रणाली है [. . .]। अगले पांच वर्षों में, हमारा प्राकृतिक खेती सहित जैविक खेती के किसी भी रूप में…

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