आईएमडी की मौसम सेवाएं उमंग मोबाइल ऐप के माध्यम से

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उमंग मोबाइल ऐप (न्यू एज गवर्नेस के लिए यूनिफायड मोबाइल ऐप्लीकेशन) भारत सरकार का आल इन वन सिंगल, एकीकृत, सुरक्षित, मल्टी-चैनल, मल्टी-प्लेटफार्म, बहु भाषी, मल्टी सर्विस मोबाइल ऐप है जो विभिन्न संगठनों (केंद्रीय एवं राज्य) की उच्च प्रभाव सेवाओं की सुविधा प्रदान करने के लिए एक मजबूत बैक एंड प्लेटफार्म द्वारा पावर्ड है।  भारत के प्रधानमंत्री ने हमारे नागरिकों के लिए मोबाइल फोन पर सरकार को सुगम्य बनाने के एक वृहद लक्ष्य के साथ एक सिंगल मोबइल ऐप पर प्रमुख सरकारी सेवाओं को लाने के लिए 2017 में उमंग ऐप को लांच किया। 127 विभागों एवं 25 राज्यों की लगभग 660 सेवाएं तथा लगभग 180 यूटिलिटी बिल…

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पाइपलाइन परियोजनाओं में भारत को आत्मनिर्भर बनाना महत्वपूर्ण; श्री धर्मेंद्र प्रधान

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केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने लगभग 8000 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजनाओं की समीक्षा की। तेल और गैस कंपनियों की उपरोक्त परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। आत्मनिर्भर भारत पर जोर देते हुए मंत्री श्री प्रधान ने इन परियोजनाओं के पूर्ण स्वदेशीकरण का आह्वान किया। गेल (जीएआईएल), सितंबर 2020 तक घरेलू बोलीदाताओं से 1 लाख लाख टन स्टील की खरीद के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की लाइनपाइप निविदाओं को संसाधित (प्रोसेस) करेगी। इसके अंतर्गत 800 किलोमीटर लाइन पाइप के निर्माण…

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एआरसीआई के वैज्ञानिकों ने स्वाभाविक तरीके से सड़नशील उन्नत धातु इम्प्लांट बनाया

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टीम का मानना है कि नई विकसित मिश्र धातुएं स्वाभाविक रूप से सड़नशील स्टेन्ट और ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हैं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत स्वायत्त संस्थानों चूर्णिक धातु कर्म एवं नई सामग्री यानी पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मेटीरियल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय उन्नत शोध केंद्र(एआरसीआई) और श्री चित्रा टिरुनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस, तिरुअनंतपुरम के वैज्ञानिकों ने संयुक रूप से मानव शरीर में इस्तेमाल होने योग्य स्वाभाविक रूप से सड़नशील धातु का इम्प्लांट बनाने के लिए लौह- मैंगनीज से युक्त उन्नत मिश्र धातु बनाया है। स्वाभाविक रूप…

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जेएनसीएएसआर के वैज्ञानिकों ने मधुमेह रोगियों में इंसुलिन के निरंतर वितरण के लिए इंजेक्शन देने लायक सिल्क फाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल विकसित किया

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में मधुमेह रोगियों में इंसुलिन वितरण के लिए इंजेक्शन देने लायक सिल्क फ़ाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल विकसित किया है। इस आविष्कार के लिए एक पेटेंट आवेदन भी दाखिल किया गया है। प्रो टी गोविंदराजू और जेएनसीएएसआर की उनके अनुसंधान टीम ने जैव फ़ाइबोमोटोपेबल एडिटिव्स का उपयोग करके सिल्क फाइब्रोइन (एसएफ) सूत्र विकसित किया है और एक ऐसा इंजेक्शन एसएफ हाइड्रोजेल (आईएसएफएच) तैयार किया है जो मधुमेह के रोगियों में…

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