विदेश मंत्री डॉक्टर सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि भारत और रूस वार्षिक सकल कारोबार में तीस अरब डॉलर का लक्ष्य प्राप्त करने की तरफ बढ रहे हैं। उन्होंने आज मॉस्को में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग के बारे में दोनों देशों के सरकारी आयोग की बैठक में यह बात कही। डॉक्टर जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग में स्थिर रूप से प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग दीर्घावधि स्थिरता की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन इसे टिकाऊ बनाये रखने के लिए संतुलन की आवश्यकता है। विदेश मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश व्यापार और आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता का लाभ उठाने में सफल होंगे। डॉक्टर जयशंकर ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध को प्रगाढ करने के लिए भी इसी तरह का सहयोग जारी रहने की आशा व्यक्त की।
विदेश मंत्री ने कहा कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए लाभदायक है और भारत यह खरीद जारी रखना चाहेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बना हुआ है। इसलिए तेल और गैस का तीसरा बड़ा उपभोक्ता होने के नाते भारत को किफायती स्रोतों की आवश्यकता है, क्योंकि देश की आय बहुत अधिक नहीं है। विदेश मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित करना सरकार का बुनियादी दायित्व है कि प्रत्येक भारतीय उपभोक्ता को हरसंभव संसाधन सुलभ हों। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच विशेष रूप से स्थिर और समय के साथ जांचे-परखे संबंध हैं और भविष्य में भी ऐसे ही बने रहेंगे।
डॉक्टर जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री के साथ टिकाऊ और संतुलित साझेदारी को सुदृढ़ करने पर चर्चा की। उन्होंने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, फार्मा, कृषि और पोत परिवहन के क्षेत्र में सहयोग बढाने के रास्ते तलाशने पर भी विचार-विमर्श किया।