केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों (पीसीवीसी) द्वारा टीके की खरीद की स्थिति और प्रगति की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों (पीसीवीसी) द्वारा टीके की खरीद की स्थिति और प्रगति की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने आज वीडियो कांफ्रेंस (वीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित 15 राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों के स्वास्थ्य सचिवों तथा वरिष्ठ टीकाकरण अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में दो कोविड-19 टीका निर्माताओं – मेसर्स भारत बायोटेक और मेसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के नोडल प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

देशव्यापी कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के दायरे में सबको शामिल करने के लिए संशोधित दिशानिर्देशों और हाल में जारी परामर्शों के आलोक में, इन राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों में निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों (पीसीवीसी) द्वारा टीके की खरीद और टीकाकरण की प्रगति का जायजा लिया गया। राज्यों को ऑर्डर प्लेसमेंट के लिए बैकएंड मैनेजमेंट टूल के रूप में को-विन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के बारे में फिर से सूचित किया गया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांग को संतुलित करने को भी कहा गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने पीसीवीसी के माध्यम से किए जा रहे टीकाकरण की धीमी गति को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने चिंता के विषयों पर प्रकाश डाला और राज्यों को इन चीजों को लेकर सलाह दी:

कई निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों (पीसीवीसी) ने कोविड टीकों की निर्धारित मात्रा के लिए कोई विवरण नहीं दिया है। कई राज्य सरकारों को पीसीवीसी द्वारा टीके की खरीद में मदद करने की जरूरत है। राज्यों को रोजाना आधार पर स्थिति का जायजा लेने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गयी थी कि निर्धारित मात्रा के लिए विवरण जल्दी से निजी टीका निर्माताओं को दिया जाए।
कई मामलों में, जहां कोविड टीके के लिए राज्य सरकार के पास मांगपत्र दिया गया है, उन टीकों की पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है। कुछ मामलों में, पूरे ही मांग के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया है। राज्य सरकारों और पीसीवीसी को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गयी थी कि मांग की गयी मात्रा और उनकी खरीद के भुगतान के बीच का अंतर शून्य हो।
कुछ राज्यों में, राज्यों/पीसीवीसी द्वारा वे टीके प्रत्यक्ष रूप से नहीं लिए गए जिनके लिए भुगतान कर दिया गया है। राज्यों/पीसीवीसी को भेजी गयी खुराकें तुरंत लेने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कुछ राज्यों में, जहां भी पीसीवीसी द्वारा टीके की खुराक उठाई गयी है, वहां दिए गए कोविड टीकों की संख्या, उठाए गए टीकों की संख्या से कम दर्ज की गयी है। राज्यों और पीसीवीसी को इसकी समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गयी थी कि अप्रयुक्त टीकों की बाकी खुराक लोगों को तेजी से दे दी जाए।

पीसीवीसी के माध्यम से टीकाकरण की धीमी गति पर प्रकाश डालते हुए, राज्यों को सलाह दी गयी कि वे पीसीवीसी द्वारा टीके की खरीद की स्थिति और प्रगति को रोजना जायजा लें। उन्हें पीसीवीसी और टीका निर्माताओं के बीच त्वरित और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने की सलाह दी गयी ताकि किसी भी तरह की बाधा आने पर उसे दूर किया जा सके। यह कहा गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राज्यों को बतायी जाने वाली कोविड टीकों की अग्रिम संभावित उपलब्धता के बारे में राज्यों को भी अपने नागरिकों को सूचित करने की जरूरत है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों के नोडल अधिकारियों और पीसीवीसी के लिए को-विन पर मांग के बारे में जानकारी, खुराक की मात्रा के भुगतान आदि के लिए पांच क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया है। राज्यों को यह इंगित करने की सलाह दी गयी थी कि क्या किसी और पुनश्चर्या प्रशिक्षण सत्र की जरूरत है। इनका आयोजन राज्यों की जरूरत के आधार पर किया जाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान, मांग एकत्रीकरण के लिए राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों की भूमिका और टीके तेजी से रवाना करने में कोविड टीका निर्माताओं की भूमिकाओं को रेखांकित किया गया।

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