राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तालोजा सेंट्रल जेल नवी मुम्बई और दमदम केन्द्रीय सुधार गृह में दो कैदियों की आत्महत्या और संबंधित अधिकारियों द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद इस मामले में समुचित रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। इन मामलों की कार्यवाही के दौरान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि इन घटनाओं से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की जेलों में कुप्रबंधन का पता चलता है। आयोग ने कहा है कि जेल मैनुअल में प्रलोभन मुक्त वातावरण प्रदान करने के पर्याप्त प्रावधान हैं और इससे किसी भी कैदी को आत्महत्या करने का अवसर नहीं मिलता है। आयोग ने मुम्बई और कोलकाता उच्चन्यायालयों के रजिस्ट्रार के माध्यम से विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के जेल परिसरों की स्थिति के बारे में चार हफ्ते के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है।
आयोग ने रायगढ और कोलकाता के जिला मजिस्ट्रेटों से चार हफ्ते के अंदर समुचित रिपोर्ट भेजने के बारे में अंतिम अनुस्मारक भी भेजा है। आयोग ने कहा है कि यदि संबंधित अधिकारी रिपोर्ट नहीं भेजते हैं तो वह मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कडी कार्रवाई करने पर मजबूर हो जायेगा।