केंद्र सरकार ने भारत के मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण का एटलस जारी किया

केंद्र सरकार ने भारत के मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण का एटलस जारी किया

केंद्रीय पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने आज स्वस्थ और सतत इकोसिस्टम के लिए भूमि क्षरण को रोकने और इसकी पहले की स्थिति प्राप्त करने के लिए जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया। मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस के अवसर पर आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम समारोह में बाबुल सुप्रियो ने कहा कि इससे बेहतर अर्थव्यवस्था और समग्र मानव कल्याण में सहायता मिलेगी।

सभी पर्यावरणीय और आर्थिक चिंताओं में भूमि की महत्वपूर्ण भूमिका को समझने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से मंत्रालय ने मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस मनाया। इस तरह की चिंताओं का सामना विश्व के साथ-साथ भारत भी कर रहा है।

इस अवसर पर बाबुल सुप्रियो ने “भारत के मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण एटलस” का नवीनतम संस्करण जारी किया। इसे अहमदाबाद स्थित एप्लीकेशन सेंटर, इसरो ने प्रकाशित किया है। यह एटलस 2018-19 की समयावधि के लिए अपरदित भूमि का राज्यवार क्षेत्र को दिखाता है। इसके अलावा यह 2003-04 से लेकर 2018-19 तक यानी 15 वर्षों की अवधि के लिए परिवर्तन विश्लेषण भी प्रदान करता है।

मंत्रालय में सचिव आरपी गुप्ता ने कहा कि इस एटलस के मुख्य निष्कर्ष न केवल एक तैयार संदर्भ के रूप में उपयोगी हैं, बल्कि महत्वपूर्ण आधारभूत व अस्थायी डेटा और तकनीकी इनपुट प्रदान करके भूमि की पहले की स्थिति प्राप्त करने लक्ष्यों को हासिल के लिए परिकल्पित राष्ट्रीय कार्य योजना को मजबूत करने में भी सहायक होंगे।

इस कार्यक्रम में कॉफी टेबल बुक “इंडिया होस्टिंग यूएनसीसीडी-सीओपी 14” का विमोचन और यूएनसीसीडी-सीओपी 14 पर एक लघु फिल्म का विमोचन भी हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन व्यक्तियों और समूहों को ऐसी पहल करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो भूमि को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रख सकें।

भारत ने सितंबर 2019 में मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी- 14) के 14 वें सत्र की मेजबानी की थी। भारत भूमि क्षरण तटस्थता (एलडीएन) की राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने और 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर अपरदित भूमि की पहले की स्थिति प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहा है, जो भूमि संसाधनों के टिकाऊ और अनुकूलतम उपयोग पर केंद्रित है।

भारत पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के केंद्र में भूमि क्षरण के मुद्दे को लाने में सबसे आगे रहा है। भारत सरकार ने भूमि को पहले की स्थिति में ले जाने से संबंधित राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति करने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण को अपनाई है।

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