लोकसभा ने आज वर्ष 2023-24 के लिए पूरक मांगों के अनुदान और वर्ष 2020-21 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों के पहले भाग को मंजूरी दे दी है। अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और राजकीय घाटे को कम करने की दिशा में सरकार के प्रयासों और गरीबों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2023-24 के लिए कुल एक लाख 29 हजार करोड़ रुपये पूरक मांगों में से मनरेगा योजना के लिए 20 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि इस आपूर्ति अनुदान के साथ चालू वित्त वर्ष के लिए कुल 80 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
वित्त मंत्री ने किसानों के लिए पौष्टिक आहार आधारित सब्सिडी की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि उर्वरक सब्सिडी के लिए 16,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल के जीर्णोद्धार के लिए 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक पूंजी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। वित्त मंत्री ने बताया कि पूरक अनुदानों के अंतर्गत 8,500 करोड़ रुपये उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इससे पहले सदन में चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि इससे रुपये के भाव में कमी हुई है और आम लोग बचत नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीवाद को बढावा दे रही है जिससे उद्यमी देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उर्वरक के लिए सरकार पौष्टिक आधारित सब्सिडी उपलब्ध करा रही है लेकिन जैवीय उर्वरक और ऑर्गेनिक उर्वरकों के उत्पादन और उसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है।
