एयरो इंडिया का 14वां संस्‍करण 13 से 17 फरवरी तक बेंगलुरु में होगा

एयरो इंडिया का 14वां संस्‍करण 13 से 17 फरवरी तक बेंगलुरु में होगा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत ड्रोन, साइबर प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि देश में एक मज़बूत रक्षा विनिर्माण व्‍यवस्‍था तैयार की जा रही है, जिसके कारण भारत नए रूप में उभर रहा है और हाल के वर्षों में रक्षा निर्यातक देश के रूप में आगे बढ़ रहा है। आज नई दिल्‍ली में राजदूतों के सम्‍मेलन में रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की बड़ी जनसंख्‍या और प्रचुर कुशल कार्यबल से उच्‍च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्‍टार्टअप के आगे बढने से नई व्‍यवस्‍था का सृजन हुआ है। उन्‍होंने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात पिछले पांच वर्ष में आठ गुना बढ़ा है और यह अब 75 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है।

मेक-इन-इंडिया के महत्‍व पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पहल मेक-फॉर-द-वर्ल्‍ड की भावना को भी शामिल कर लेती है। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि मेक-इन-इंडिया की दिशा में भारत का प्रयास न तो पृथकतावादी है और न ही वह केवल भारत के लिए है। उन्‍होंने कहा कि आत्मनिर्भर पहल अन्‍य भागीदार देशों के साथ नई शुरुआत है। उन्‍होंने कहा कि भागीदारी और संयुक्‍त प्रयास ऐसे महत्‍वपूर्ण तथ्‍य है, जो अन्‍य देशों के साथ देश के रक्षा उद्योग की भागीदारी को अलग करते हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत विश्‍व व्‍यवस्‍था की ऐसी वर्गीकृत अवधारणा में विश्‍वास नहीं करता, जहां कुछ देशों को अन्‍य देशों की तुलना में श्रेष्‍ठ माना जाता है। अगले महीने 13 से 17 फरवरी तक बेंगलुरु मे होने वाले एयरो इंडिया 2023 के चौदहवें संस्‍करण के बारे में राजनाथ सिंह ने कहा कि एयरो इंडिया सूचना, विचार और उड्डयन उद्योग में नई प्रौद्योगियों के विकास के आदान-प्रदान के बारे में अवसर प्रदान करेगा। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि भारतीय एयरो स्‍पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र भविष्‍य की चुनौतियों से निपटने और अवसरों का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत में जी-20 शिखर सम्‍मेलन के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का यह प्रयास होगा कि जी-20 में आम सहमति बनाई जाए और सुरक्षित, समृद्ध तथा दीर्घकालीक विश्‍व के लिए नए एजेंडा को रूप दिया जाए। उन्‍होंने जी-20 की अध्‍यक्षता को विश्‍व में भारत की क्षमता प्रदर्शित करने का एक अवसर बताया।

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