उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में ध्‍वस्‍त सिल्‍क्‍यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने का काम चल रहा है

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में ध्‍वस्‍त सिल्‍क्‍यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने का काम चल रहा है

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में ध्‍वस्‍त सिल्‍क्‍यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने का काम चल रहा है। एक मीटर की मैन्युअल ड्रिलिंग पूरी हो गई, पाइप को 1 मीटर तक अंदर डाला गया।

केन्‍द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल वी. के. सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव प्रमोद कुमार मिश्रा, केन्‍द्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्‍ला और उत्तराखण्ड के मुख्‍य सचिव एसएस संधु ने आज राहत और बचाव अभियान का निरीक्षण किया। प्रमोद कुमार मिश्रा ने सुरंग में फंसे श्रमिकों से बातचीत भी की। उन्होंने आश्वासन दिया कि बचाव अभियान में सभी संभव विकल्‍पों का प्रयोग किया जाएगा।

राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्‍य लेफ्टिनेंट जनरल सईद अता हसनैन ने आज नई दिल्‍ली में संवाददाताओं से कहा कि ऑगर मशीन सहित अन्‍य बाधाओं को हटा दिया गया है और अब बाकी पन्‍द्रह मीटर की दूरी के लिए हाथ से खुदाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि तीन-तीन व्‍यक्तियों के दो दल बनाए गए हैं। उन्‍होंने कहा कि बारिश से बचाव अभियान पर कोई प्रभाव नही पडेगा। उन्‍होंने कहा कि सभी श्रमिकों अपने-अपने परिजनों और बचाव दल के सदस्‍यों से बात कर पा रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने कहा कि बचाव अभियान में पांच तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि ऊपर से खुदाई-वर्टीकल ड्रिल में अभी तक 32 मीटर खुदाई हो चुकी है। इससे श्रमिकों को और ज्‍यादा ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि सुरंग तक मशीनी उपकरण लाने वाले वाहन रास्‍ते में हैं। उन्होंने बताया कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को ताजा भोजन, ताजे फल, पानी और दवा पाईप के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्‍टरों का एक दल श्रमिकों के मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य की निगरानी कर रहा है।

लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने बताया कि श्रमिकों को निकाले जाने पर तुरंत उनको चिकित्‍सा सहायता देने के पूरे प्रबंध किए गए है। पर्याप्‍त संख्‍या में एम्‍बुलेंस तैयार रखी गई है जो उन्‍हें ऋषिकेश के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान ले जाया जाएगा। जो श्रमिक गम्‍भीर हालत में होंगे उन्‍हें वायु मार्ग से अस्‍पताल भेजा जाएगा।

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