आजादी के लिए हमारा आंदोलन और इतिहास मानवाधिकारों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पूरी दुनिया जिस समय प्रथम विश्व युद्ध की हिंसा से जूझ रही थी, उस समय भारत ने ‘अधिकार और अहिंसा’ का रास्ता सुझाया। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से 28वें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के लिए हमारा आंदोलन और इतिहास मानवाधिकारों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी भारत ने दुनिया को समानता और मानवाधिकारों पर एक नया दृष्टिकोण पेश किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार समाज में हाशिए पर रह रहे लोगों के लिए सुविधाएं, बुनियादी जरूरतें और बेहतर आजीविका मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना किसी भेदभाव के समाज के प्रत्‍येक व्‍यक्ति की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए सभी सुधारों और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि गरीबों को न केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जा रही हैं बल्कि उन्‍हें अनेक अवसर उपलब्‍ध कराकर उनकी गरिमा को बहाल किया जा रहा है और उन्‍हें सशक्‍त बनाया जा रहा है।

इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पिछले सात वर्षों में लगभग 60 करोड़ गरीब लोगों की सुख-सुविधा पर ध्‍यान दिया गया है। महिलाओं के लिए दस करोड़ शौचालय बनाये गये और करीब चार करोड़ घरों में बिजली पहुंचाई गई।

राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए एक दीर्घकालिक और ठोस योजना बनाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि लोगों को शीघ्र न्‍याय मिलना उनका मौलिक अधिकार है लेकिन अभी भी यह एक सपने जैसा है।

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