भारत ने लुप्त प्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी संधि के अंतर्गत लीथ सॉफ्ट शेल कछुए के सरंक्षण के लिए ठोस कदम उठाये हैं। कछुए की इस प्रजाति को संधि के परिशिष्ट-दो से परिशिष्ट-एक में स्थानांतरित करने का भारत का प्रस्ताव पनामा में संधि में शामिल देशों ने स्वीकार कर लिया है। इससे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस प्रजाति के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पाबंदी लगेगी।
पर्यावरण मंत्रालय में विशेष सचिव और वन महानिदेशक चन्द्र प्रकाश गोयल ने 23 नवम्बर को यह प्रस्ताव पेश किया था।
लीथ का सोफ्टशेल कछुआ ताजे पानी का नरम खोल वाला एक बड़ा कछुआ है। यह कछुआ प्रायद्वीपीय भारत के लिए स्थानिक है और यह नदियों और जलाशयों में रहता है। पिछले 30 वर्षों में कछुए की प्रजातियो का बहुत अधिक शोषण हुआ है। अवैध रूप से इसका शिकार किया गया और इसका उपभोग किया गया। मांस के लिए विदेशों में इसका अवैध रूप से कारोबार भी किया गया है। पिछले 30 वर्षों में इस कछुए की प्रजाति की आबादी में 90 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। अब इस प्रजाति का पता लगाना मुश्किल है। प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ द्वारा इसे ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ कछुए की प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।