आज मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा है। 1948 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की स्मृति में 1950 से हर वर्ष 10 दिसम्बर को यह दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने अपने संदेश में कहा कि मानवाधिकर दिवस मनाना इस तथ्य की पुष्टि करता है कि प्रत्येक मानव अविछिन्न अधिकारों के साथ पैदा होता है, जो समानता के बुनियादी व्यवहार में निहित हैं।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बडा और सशक्त लोकतंत्र है, जहां ‘विविधता में एकता है’। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन्ह’ की धारणाएं प्रदान दी हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत द्वारा विश्व समुदाय को दी गई मदद इसी विश्वास पर आधारित है।
