उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित वैश्विक समारोह में भाग लिया

आर्ट ऑफ लिविंग 45 वर्ष समारोह

बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य वैश्विक समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने संगठन के वैश्विक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने शांति, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता जैसे मूल्यों को दुनिया भर में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आंदोलन पिछले साढ़े चार दशकों से “आंतरिक शांति ही बाहरी सद्भाव की नींव है” के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है और आज लगभग 180 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुका है। उन्होंने इसे एक ऐसी वैश्विक शक्ति बताया जो करुणा, सहनशीलता और आनंद के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है।

उपराष्ट्रपति ने आध्यात्मिकता के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भक्ति केवल व्यक्तिगत समर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं, परिवार, समाज और पूरे मानवता के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन व्यक्ति को शांति और संतुलन के साथ जीने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी दुनिया को शांति, जागरूकता और सद्भाव का संदेश दिया है। उनके अनुसार, ध्यान, सेवा, शिक्षा, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संगठन का कार्य सामाजिक बदलाव का एक मजबूत उदाहरण है।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ध्यान और एकाग्रता आज के समय में अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि एक स्थिर और केंद्रित मन बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। उन्होंने युवाओं की भागीदारी को सराहते हुए कहा कि आधुनिकता और भारतीय परंपराओं का संतुलन ही भविष्य की दिशा तय करेगा।

इस अवसर पर नशा मुक्ति जैसे अभियानों में आर्ट ऑफ लिविंग के योगदान की भी प्रशंसा की गई और युवाओं को आत्म-संयम एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में उपराष्ट्रपति ने गणपति मंदिर में पूजा-अर्चना की और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर आधारित एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल, देश-विदेश के गणमान्य अतिथि, स्वयंसेवक और हजारों अनुयायी उपस्थित रहे।

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