भारत ने कांगो में इबोला के प्रकोप को नियंत्रित करने के प्रयासों में सहयोग के लिए आपातकालीन चिकित्‍सा सहायता भेजी

भारत कांगो इबोला सहायता

भारत ने कांगो में इबोला प्रकोप को नियंत्रित करने में सहायता के लिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता भेजी है। यह सहायता अफ्रीका में फैले बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इबोला के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को समर्थन देने के उद्देश्य से दी गई है। इथियोपिया स्थित Africa Centres for Disease Control and Prevention ने बताया कि भारत से भेजी गई दवाएं युगांडा में पूर्वी अफ्रीका क्षेत्रीय समन्वय केंद्र को प्राप्त हुई हैं। इनमें निदान, उपचार और संक्रमण रोकथाम से जुड़ी आवश्यक सामग्री शामिल है। यह राहत सामग्री आगे कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के प्रभावित क्षेत्रों तक…

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WHO ने इबोला के प्रकोप को अंतर्राष्ट्रीय महत्‍व का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया; जबकि अफ्रीका सीडीसी ने महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

WHO इबोला स्वास्थ्य आपातकाल घोषणा

मोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में इबोला के संदिग्ध प्रकोपों के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization ने 17 मई 2026 को स्थिति को अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है। यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम 2005 के तहत लिया गया। अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र Africa Centres for Disease Control and Prevention ने भी इस प्रकोप को महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHECS) घोषित किया है। यह निर्णय क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए लिया गया है। WHO…

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मास्क की ये किस्म आपको काफी हद तक संक्रमण से बचाने में मददगार होगी

जेनेवा : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि तीन-परत वाले कपड़े के मास्क का उपयोग कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है। यह मुखौटा घर पर या एक कपड़ा कारखाने में बनाया जा सकता है। हालांकि, इसमें कपड़े की तीन परतें शामिल होनी चाहिए। एक शोषक कपड़े से बनी परत, एक कपड़े से मिलकर मध्य परत जो एक फिल्टर के रूप में कार्य करे, और सबसे बाहरी परत एक गैर-शोषक कपड़े की। ये पॉलिएस्टर जैसे शोषक कपड़े से बना होना चाहिए। Read More :…

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बिना लक्षण वाले मरीजों से कोरोना फैलना मुश्किल : WHO

नयी दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोरोना के बिना लक्षण वाले (एसिम्प्टोमैटिक) मरीजों से यह बीमारी दूसरों में मुश्किल से फैलती है। संगठन ने कहा कि हमारे पास जो आंकड़े हैं, उससे यह बात साबित होती है। पिछले कुछ समय से शोधकर्ता एसिम्प्टोमैटिक मरीजों पर संदेह जता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे मरीज बीमारी से निपटने में परेशानी बने हुए हैं। Read More : सीएम केजरीवाल को हुआ बुखार और गले में खराश, जल्द करवाएंगे कोरोना वायरस टेस्ट महामारी की शुरुआत में इस बात…

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