सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कोई भी अदालत किसी महिला विशेष रूप से नाबालिग को उसकी इच्छा के विरूद्ध गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुईंया की पीठ ने आज 15 वर्ष की लड़की को सात महीने से अधिक के गर्भ को चिकित्सीय रूप से हटाने की अनुमति दी। पीठ ने कहा कि महिला की प्रजनन संबंधी स्वायत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि विशेषकर प्रजनन के मामले में अपने शरीर से जुड़े निर्णय लेने का…
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