केंद्र सरकार ने राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों से डॉक्‍टरों और स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों पर हमला करने वालों से सख्‍ती से निपटने को कहा

केंद्र सरकार ने राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों पर हमला करने वालों से सख्‍ती से निपटने को कहा है। केंद्र ने कहा है कि हमला करने वाले लोगों पर संस्‍थागत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए। राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को लिखे पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्‍ला ने स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों पर हमला करने वाले लोगों के विरूद्ध महामारी अधिनियम के प्रावधान लागू करने को कहा है। इन प्रावधानों में चिकित्‍सकों और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों पर हमले करने या उन्‍हें धमकी देने को प्रतिबंधित किया गया है। अजय कुमार भल्‍ला ने दोहराया है कि सोशल मीडिया पर भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देने वाले तत्‍वों पर नज़र रखी जानी चाहिए।

गृह सचिव ने इस संबंध में पहले जारी की गई सलाह का उल्‍लेख करते हुए कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संस्‍थानों और विशेष रूप से कोविड अस्‍पतालों में प्रवेश नियंत्रित किया जाना चाहिए। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस को तत्‍परता से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि कोविड के खिलाफ संघर्ष में चिकित्‍सकों और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के योगदान को दर्शाने के लिए अस्‍पतालों में पोस्‍टर लगाने चाहिए और सोशल मीडिया पर जानकारी उपलब्‍ध करानी चाहिए।

अजय कुमार भल्‍ला ने जोर दिया कि चिकित्‍सकों या स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों पर हमला या धमकी से उनका मनोबल कमजोर होता है और उनमें असुरक्षा की भावना उत्‍पन्‍न होती है। इससे स्‍वास्‍थ्‍य सेवा तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

केंद्र सरकार ने राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्‍वास्‍थ्‍य सेवा समुदाय की सुरक्षा और उनके सरोकारों के लिए तत्‍परता से काम करने का अनुरोध किया है।

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