भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा क्यों है जरूरी ?

हिंदू धर्म में हर देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा विधि और पूजा सामग्रियां अलग-अलग तरह की होती हैं। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ और धार्मिक- मांगलिक कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को विध्नहर्ता कहा गया है इसलिए उनकी पूजा सबसे पहले की जाती है ताकि शुभ कार्य में किसी भी तरह का विध्न न आए। भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास जरूर चढ़ाई जाती है।…

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दिनांक 21 जून 2020 (31 ज्येष्ठ, शक संवत 1942) को वलयाकार सूर्य ग्रहण घटित होगा सोशल मीडिया पर लाइव

sury grahan

“ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाएं विज्ञान के बारे में युवाओं को उत्साहित करने और वास्तव में उनके साथ ही बड़े पैमाने पर समाज को समझाने और वैज्ञानिक मनोभाव पैदा करने के असाधारण अवसर होते हैं” : प्रोफेसर आशुतोष शर्मा, सचिव, डीएसटी 21 जून, 2020 को भारत के उत्तरी हिस्सों में सुबह 10:25 बजे से वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। इस संदर्भ में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान एवं शोध संस्थान (एआरआईईएस या एरीज), नैनीताल ने 19 जून 2020 को दोपहर 03.30 बजे एरीज के निदेशक डॉ. दीपांकर बनर्जीद्वारा ‘सूर्य ग्रहण का विज्ञान’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया है। ज़ूम, यूट्यूब और फेसबुक के जरिए सूर्य ग्रहण के सीधा प्रसारण की व्यवस्था की गई है। सूर्य ग्रहण अफ्रीका, एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों से देखा जा सकेगा और दिलचस्प बात यह है कि ग्रहण का पीक भारत के उत्तरी हिस्से में दिखाई देगा, जो सुबह 10:25 बजे से शुरू होकर 12:08 बजे अधिकतम ग्रहण और 01:54 बजे समाप्त हो जाएगा। इससे पहले वलयाकार ग्रहण 26 दिसंबर 2019 को दक्षिण भारत से और आंशिक ग्रहण के रूप में देश के विभिन्न हिस्सों से देखा गया था। अगला वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में अगले दशक में दिखाई देगा, जो 21 मई 2031 को होगा, जबकि 20 मार्च 2034 को पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जाएगा। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा (अमावस्या के चरण में) सूरज की आंशिक या पूरी रोशनी को रोक लेता है और उसी हिसाब से आंशिक, वलयाकार और पूर्ण सूर्यग्रहण होता है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और घना अंधेरा छा जाता है जिसे उम्ब्रा और कम अंधेरे वाले क्षेत्र को पेनम्ब्रा के रूप में जाना जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्य ग्रहणों में सबसे दुर्लभ है। भले ही हर महीने अमावस्या आती हो, लेकिन हम ग्रहण को इतनी बार नहीं देख पाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पृथ्वी-सूर्य प्लेन के लिहाज से चंद्रमा की कक्षा लगभग 5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। इस कारण सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी का संयोग (एक ही सीध में) एक दुर्लभ खगोलीय घटना के तौर पर दिखाई देता है। डीएसटी के सचिव, प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा, ‘ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाएं विज्ञान के बारे में युवाओं को उत्साहित करने और वास्तव में उनके साथ ही बड़े पैमाने पर समाज को समझाने और वैज्ञानिक मनोभाव पैदा करने के असाधारण अवसर होते हैं।’ एरीज ने ग्रहण देखने के दौरान क्या करें और क्या न करें, इसको लेकर एक सूची तैयार की है: क्या करें: 1- ग्रहण देखने के लिए और आंखों को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए ग्रहण देखने वाले चश्मों (आईएसओ प्रमाणित) या उचित फिल्टर्स के साथ कैमरे का इस्तेमाल करें। 2- वलयाकार सूर्य ग्रहण देखने का सबसे सुरक्षित तरीका पिनहोल कैमरे से स्क्रीन पर प्रोजेक्शन या टेलिस्कोप है। 3- ग्रहण के दौरान खाना-पीना, स्नान करना, बाहर जाने में कोई दिक्कत नहीं है। ग्रहण को देखना एक शानदार अनुभव होता है। भारत में देश के उत्तरी भाग के कुछ स्थानों (राजस्थान, हरियाणा तथा उतराखण्ड के हिस्सों) के संकीर्ण गलियारे में प्रात: ग्रहण की वलयाकार प्रावस्था दृश्यमान होगी जबकि देश के शेष भाग में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप…

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हलहारिणी अमावस्या 21 जून को, सूर्य ग्रहण के बाद करें दान और तर्पण

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की अमावस्या 21 जून को आ रही है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस पर्व का विशेष महत्व है। इसे हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। इस दिन हल और खेती के अन्य उपकरणों की पूजा की जाती है। क्योंकि इस अमावस्या के बाद वर्षा ऋतु आती है। आषाढ़ अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण का विशेष महत्व होता है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस पर्व पर दान करने से पुण्य मिलता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार…

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21 जून को लगेगा चूड़ामणि सूर्यग्रहण, जानें किस-किस राशि की खुलेगी किस्मत

देश में रविवार (21 जून) को वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई पड़ेगा। यह ग्रहण चूड़ामणि ग्रहण होगा. जो 31 ज्येष्ठ, शक संवत 1942 को लग रहा है। भारत में देश के उत्तरी भाग के कुछ स्थानों (राजस्थान, हरियाणा तथा उताराखण्ड के हिस्सों) के संकीर्ण गलियारे में प्रात: ग्रहण की वलयाकार प्रावस्था दृश्यमान होगी जबकि देश के शेष भाग में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। ग्रहण के संकीर्ण वलय पथ में स्थित रहने वाले कुछ प्रमुख स्थान हैं – देहरादून, कुरुक्षेत्र, चमोली, जोशीमठ, सिरसा, सूरतगढ़ आदि। वलयाकार ग्रहण…

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