शुक्रवार को करें वैभवलक्ष्‍मी की पूजा, सुख समृद्धि की होगी बरसात

हिन्दू धर्म में वैभवलक्ष्मी का पूजन सुख-समृद्धि, धन, वैभव और ऐश्‍वर्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है। माना जाता है, नियम पूर्वक पूरे विधि विधान के साथ इनका पूजन करने से व्यक्ति को ये सभी चीजें प्राप्‍त होती हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता के पूजन के लिए निश्‍चित है। इन मे से मां लक्ष्मी पूजन के लिए शुक्रवार को चुना गया है। इस दिन देवी के वैभवलक्ष्मी स्वरुप की भी आराधना की जाती है, जो वैभव और धन की देवी मानी…

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दस महाविद्याओं की आराधना से दूर होते हैं सारे कष्ट, जानिए दसविद्या के बारे में

आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 29 जून तक रहेंगे। एक वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र सामान्य रहते हैं, जबिक माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त रहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार इन दिनों दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। ये दस महाविद्याएं हैं- काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी। दिव्योर्वताम सः मनस्विता: संकलनाम। त्रयी शक्ति ते त्रिपुरे घोरा छिन्न्मस्तिके च।। देवी, अप्सरा, यक्षिणी, डाकिनी, शाकिनी और पिशाचिनी आदि में सबसे सात्विक…

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गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की करें साधना प्राप्त होंगी सिद्धियां, जीवन में आएंगी खुशियां

नवरात्रि का त्योहार व्रत और साधना के लिए होता है। हिन्दू माह के अनुसार नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। चार बार का अर्थ यह कि यह वर्ष के महत्वपूर्ण चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- पौष, चैत्र, आषाढ और अश्विन।इसमें से चैत्र माह की नवरात्रि को वासंतिक नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। प्रथम संवत् प्रारंभ होते ही बसंत नवरात्रि व दूसरा शरद नवरात्रि, जो कि आपस में 6 माह की दूरी पर है। बाकी बची दो आषाढ़ और…

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पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आज से शुरू, जानें इससे जुड़ी खास बातें

एक बार फिर ओडिशा में देश और विदेशों से श्रद्धालुओं का जत्था विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंच चुका है। दुनियाभर में मशहूर इस यात्रा का शुभारंभ 23 जून, मंगलवार को हो रहा है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक जगन्नाथ रथ यात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल द्वितीय तिथि को शुरू होती है। इसका आयोजन पूरे नौ दिनों तक किया जाता है। इस यात्रा में जगन्नाथ भगवान अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ जगन्नाथ मंदिर से निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। तीनों भाई…

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