आप सभी जानते ही होंगे साल में चार नवरात्रि होती है। ऐसे में दो गुप्त नवरात्रि होती है, जिन्हें माघ गुप्त नवरात्रि और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। वहीं इस दौरान रात के समय माता दुर्गा की गुप्त पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान माता गुप्त मनोकामनाएं पूरी करती हैं और साधक को धन, ऐश्वर्या, सुख, शांति सहज ही पूजन से प्राप्त हो जाता है। इसी के साथ हम आप सभी को बता दें कि गुप्त नवरात्रि 22 जून से है। देवी के नौ…
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क्यों लगता है सूर्य ग्रहण, जानिए पौराणिक कथा
आप सभी को बता दें कि इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून यानी अगले रविवार को लगने जा रहा है। ऐसे में इस बार लगने वाला सूर्य ग्रहण खास होने वाला है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा और सूर्य किसी चमकीले छल्ले की तरह नजर आएगा। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पौराणिक संबंध के बारे में। शास्त्रों को माना जाए तो समुद्र मंथन और सूर्य ग्रहण का पौराणिक संबंध है। वहीं ऐसी पौराणिक मान्यता है कि सूर्य ग्रहण का संबंध राहु-केतु ग्रह…
Read Moreयोगिनी एकादशी के व्रत से मिट जाते हैं सारे पाप, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
एकादशी के व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ और पुण्य फलदायी माना जाता है। निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं, इसलिए यह एकादशी तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। इस एकादशी के व्रत का पुण्यफल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना प्राप्त होता है। योगिनी एकादशी का व्रत इस साल 17 जून 2020 (बुधवार) को है।…
Read Moreबिल्व पत्र का उपयोग कितने दिनों तक किया जा सकता है, जानें क्या है भोलेनाथ की पूजा में इसका विशेष महत्व
हिंदू धर्म में हर भगवान की पूजा-अर्चना के लिए हफ्ते का एक दिन बताया गया है। ऐसे में भगवान शिव की पूजा के लिए सोमवार का दिन है। कई वस्तुएं अर्पित भोलेनाथ को करते हैं। शिव भगवान को पूजा में भांग, धतूरा, दूध आदि यह होती हैं। इनमें से एक बिल्व पत्र होता है जो पूजा में भोलेनाथ को अर्पित किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कितने दिनों तक बिल्व पत्र को वृक्ष पर से तोड़ने के बाद भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है। इसके…
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