कैबिनेट ने “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना” को स्वीकृति दी

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 हजार करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ अखिल भारतीय स्तर पर असंगठित क्षेत्र के लिए एक नई केन्द्र प्रायोजित “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (एफएमई)” को स्वीकृति दे दी है। इस व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा। योजना का विवरण: उद्देश्य: सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के द्वारा वित्त अधिगम्यता में वृद्धि लक्ष्य उद्यमों के राजस्व में वृद्धि खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का अनुपालन समर्थन…

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2019-20 के लिए खाद्यान्न, तिलहन और अन्य वाणिज्यिक फसलों के उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान

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कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्‍याण विभाग द्वारा 2019-20 के लिए मुख्‍य फसलों के उत्‍पादन के तीसरे अग्रिम अनुमान 15 मई, 2020 को जारी कर दिए गए हैं।  देश में मानसून मौसम (जून से सितंबर, 2019) के दौरान कुल वर्षा दीर्घावधि औसत (एलपीए) से 10 प्रतिशत अधिक रही है। तदनुसार, कृषि वर्ष 2019-20 के लिए अधिकांश फसलों का उत्‍पादन उनके सामान्‍य उत्‍पादन से अधिक होने का अनुमान है। ये अनुमान समय के साथ बहने वाली अधिक सटीक जानकारी के अनुसार संशोधन के अधीन हैं। तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2019-20 के दौरान मुख्‍य फसलों के अनुमानित उत्‍पादन इस प्रकार है: खाद्यान्‍न – 295.67 मिलियन टन (रिकार्ड) चावल – 117.94 मिलियन…

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38 और नई मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया

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अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक कृषि उपज व्यापार पोर्टल की 18 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की 1000 मंडियों तक हुई पहुंच आज 38 और नई मंडियों को ई-नाम प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया, जिसके परिणामस्वरूप नियोजित लक्ष्य के अनुसार 415 मंडियों की एक और उपलब्धि हासिल हुई। 38 मंडियां मध्य प्रदेश (19), तेलंगाना (10), महाराष्ट्र (4) और (1) गुजरात, हरियाणा, पंजाब, केरल और जम्मू-कश्मीर से एकीकृत हैं। पहले चरण में 585 मंडियों की समग्र सफलता के साथ दूसरे चरण में 415 नई मंडियों को एकीकृत करने के लिए ई-नाम  का और विस्तार  किया गया। ई-नाम प्लेटफॉर्म…

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लॉकडाउन के कारण डेयरी क्षेत्र के लिए कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज में छूट

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डेयरी क्षेत्र पर कोविड-19 के आर्थिक प्रभावों की भरपाई करने के लिए मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने एक नई योजना “डेयरी क्षेत्र के लिए कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज में छूट” की शुरुआत की है। योजना के तहत 2020-21 के दौरान डेयरी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एसडीसी और एफपीओ) को सहायता प्रदान की जायेगी। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बड़ी मात्रा में दूध की खरीद और बिक्री में कमी होने के कारण, दूध / डेयरी सहकारी समितियों ने बड़े पैमाने पर अधिक समय तक उपयोग के लायक…

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