केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कल नई दिल्ली में स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा जारी की। यह रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कार्यान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी कदम है। बोर्ड परीक्षाएं अब वर्ष में 2 बार आयोजित की जाएगी, जिससे छात्रों को अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाये रखने का अवसर मिलेगा। इससे एक बार की वार्षिक परीक्षा से विद्यार्थियों को होने वाला तनाव कम करने में मदद मिलेगी।
इसमें बुनियादी शिक्षा से लेकर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा के सभी 4 चरणों को शामिल किया गया है। इस अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा जारी होना राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक वर्ष से नई पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री महोदय ने आज राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा निरीक्षण समिति और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शिक्षण-प्रशिक्षण सामग्री समिति की पहली संयुक्त कार्यशाला को संबोधित किया। स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) का विकास 21वीं सदी की आवश्यकताओं और भारतीय ज्ञान प्रणाली के लोकाचार के साथ शिक्षा को संरेखित करने की दृष्टि से निर्देशित था। प्रोफेसर के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में, स्कूली शिक्षा के 5+3+3+4 प्रारूप पर बल देते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाने के लिए एक संचालन समिति का गठन किया गया था। यह रूपरेखा प्रारंभिक स्तर से लेकर माध्यमिक स्तर तक की संपूर्ण शैक्षिक प्रणाली को संबोधित करती है। रूपरेखा बहु-विषयक शिक्षा, मूल्यों का पोषण, रचनात्मक शिक्षाशास्त्र को प्रोत्साहन देने और विद्यार्थियों को व्यावहारिक समस्या-समाधान के लिए तैयार करने का परिचय देती है। उन्होंने कहा कि कक्षा 3 से 12 की पाठ्य पुस्तकों को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा, जिससे वे मौलिक और भविष्य के अनुरूप होंगी।
