पटना हाई कोर्ट ने बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा

बिहार में पटना हाई कोर्ट ने जाति आधारित सर्वेक्षण मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है। यह सर्वेक्षण राज्‍य सरकार ने करवाया था। मुख्‍य न्‍यायाधीश के. विनोद चन्‍द्रन और न्‍यायाधीश मधूरेश प्रसाद की खण्‍ड पीठ अगले सप्‍ताह इस मामले में अपने फैसले की घोषणा कर सकती है।

पटना हाई कोर्ट ने इस वर्ष 4 मई को सर्वेक्षण पर अन्‍तरिम रोक लगाते हुए राज्‍य सरकार को अब तक संग्रहित आंकडो को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। अदालत ने ऐसे सर्वेक्षण के उद्देश्‍य पर सवाल उठाया है और कहा है कि सर्वेक्षण की आड में यह एक तरह की जन गणना है।

याचिकाकर्ता दीनू कुमार ने बताया कि सुनवाई के दौरान जाति आधारित सर्वेक्षण कराने के राज्‍य सरकार के अधिकार के पक्ष और विपक्ष में अनेक तर्क दिये गये। उन्‍होंने कहा कि इस दौरान उच्‍चतम न्‍यायालय और अन्‍य अदालतो के महत्‍वपूर्ण फैसलो का भी उल्‍लेख किया गया।

दूसरी तरफ बिहार के महाधिवक्‍ता प्रशांत कुमार शाही ने सुनवाई के दौरान सरकार का दृष्टिकोण प्रस्‍तुत किया जिसमें हाशिये पर पडे लोगों की उन्‍नति के लिए सर्वेक्षण को आवश्‍यक बताया गया।

महाधिवक्‍ता ने कहा कि राज्‍य सरकार को जाति आधारित सर्वेक्षण करने और राज्‍य के लोगों की जाति और सामाजिक आर्थिक स्थिति के आकडे एकत्र करने का अधिकार है। सुनवाई के दौरान राज्‍य सरकार ने बताया कि सर्वेक्षण का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

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