अर्जुन मुंडा ने विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर सिकल सेल रोग के बारे में जागरूकता फैलाने से संबंधित कार्यशाला की आभासी रूप से अध्यक्षता की

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली में सिकल सेल एनीमिया रोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता की।

सिकल सेल रोग (एससीडी) एक आनुवंशिक स्थिति है, जो भारत की जनजातीय आबादी में बड़े पैमाने पर व्‍याप्‍त है। ऐसा अनुमान है कि एसटी में जन्‍म लेने वाले 86 बच्‍चों में से लगभग 1 एससीडी से ग्रसित पाया जाता है। यह रोग लाल रक्‍त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन (शरीर में ऑक्सीजन ले जाने के लिए उत्‍तरदायी) को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप अलग-अलग तरीकों से बीमारी और मृत्यु हो सकती है। ऐसे में पीडि़त व्‍यक्तियों को लंबा और भरपूर जीवन जीने में सक्षम बनाने की दिशा में एससीडी का जल्‍द पता लगाना, उसका प्रबंधन और उपचार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस रोग को जड़ से मिटाना राष्ट्र की सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सिकल सेल की स्थिति के प्रबंधन की दिशा में इस रोग की जल्‍द पहचान और नए उपचार सहित हाल ही में हुई प्रगति पर चर्चा करने के लिए इस कार्यशाला के माध्‍यम से भारत भर से विशेषज्ञों का समूह एक साथ आया।

इस दिन के महत्व को दृष्टिगत रखते हुए अर्जुन मुंडा ने अपील की, “प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा सिकल सेल उन्मूलन का दायित्‍व मिशन मोड में ग्रहण किया गया है; हालांकि, लोगों को इस बीमारी के बारे में शिक्षित करने, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर इस समस्‍या को हल करने के लिए हम सभी को निजी स्तर पर सहयोगपूर्ण प्रयास करने की आवश्यकता है। मैं सभी चिकित्सा विशेषज्ञों, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य संगठनों, स्वास्थ्य विभागों से अपील करता हूं कि वे जनजातीय लोगों के अच्छे स्वास्थ्य को प्रोत्साहन दें और जनजातीय आबादी के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए इस बीमारी से पीडि़त लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाना सुनिश्चित करें।”

इसके अतिरिक्‍त उन्होंने राज्य सरकारों से उचित बुनियादी ढांचा और सुविधाएं सुनिश्चित करके इस लक्ष्य में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि व्‍यक्ति, विशेष रूप से महिलाएं और बच्‍चे इस बीमारी से मुक्त हों और यह बीमारी आने वाली पीढ़ी को प्रभावित न कर सके।”

अर्जुन मुंडा ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन के लिए अपने मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ अन्य संबंधित मंत्रालयों, सरकारी अधिकारियों, हितधारकों, चिकित्सकों और विशेषज्ञों के साथ काम करना जारी रखने का भी आश्वासन दिया।

जनजातीय कार्य मंत्रालय में सचिव अनिल कुमार झा ने स्वागत भाषण दिया।

सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा, “हम एससीडी के नियंत्रण और सफल उन्मूलन के लिए मिशन मोड में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम परामर्श और निदान के लिए विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से अपनी पहुंच को व्‍यापक बनाने हेतु विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों, हितधारकों और गैर सरकारी संगठनों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को भी शामिल कर रहे हैं।”

इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय में अपर सचिव आर. जया, जनजातीय कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव नवल जीत कपूर और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक भी उपस्थित थे।

कार्यशाला में चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा चर्चा और विभिन्न सत्र आयोजित किए गए साथ ही साथ अधिकारियों और इस विषय के विशेषज्ञों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए।

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