तेलंगाना में निजी अंतरिक्ष वाहन कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने थ्री डी प्रिंटेड धवन टू इंजन का दो सौ सेकेंड की अवधि का परीक्षण किया। कंपनी ने इस इंजन को अपने भारी वाहन विक्रम टू के लिए विकसित किया है। जिस क्रायोजेनिक इंजन का कल परीक्षण किया गया उसका इस्तेमाल विक्रम टू के उन्नत संस्करण के ऊपरी चरण में किया जाएगा। ठोस ईंधन चरण के बजाय ऊपरी चरण का क्रायोजनिक इंजन रॉकेट की पे-लोड क्षमता को बढ़ाता है।
स्काईरूट ने अपनी पहली उप-कक्षीय उड़ान का निष्पादन पिछले वर्ष नवंबर में किया था। इस प्रक्षेपण में एकल चरण ठोस ईंधन विक्रम एस रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। रॉकेटों की इस श्रृंखला में विक्रम वन रॉकेट पहला ऐसा रॉकेट है जिसे कंपनी द्वारा विकसित किया जा रहा है। इस रॉकेट में कंपनी तीन ठोस ईंधन चरणों का इस्तेमाल उपग्रहों को कक्षा में ले जाने के लिए करेगी।
हैदराबाद से जारी कंपनी की एक पत्रिका में कहा गया है स्काईरूट इस वर्ष के अंत तक अपनी पहली कक्षीय उड़ान निष्पादित करने की योजना बना रही है। उन्नत विक्रम टू रॉकेट अगले वर्ष तक प्रक्षेपण के लिए तैयार कर लिया जाएगा। यह कार्यक्रम इस कंपनी को दक्षिण एशिया का पहला निजी प्रक्षेपक बनाएगा।