प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तीसरे पहर वाराणसी में महीने भर चलने वाले काशी तमिल संगमम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश के लोगों का आह्वान किया कि वे भाषा के आधार पर भेद-भाव दूर करें और भावात्मक एकता सुदृढ़ करें। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास समायोजन का रहा है। उन्होनें कहा कि देश नदियों, स्थानों, संस्कृति और दर्शन के समायोजन के लिए जाना जाता है और काशी तमिल संगमम इसी परम्परा को आगे बढ़ाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समारोह ऐसे अवसर पर आयोजित किया जा रहा है जब राष्ट्र आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकीकरण का मंच बनेगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरूगन और तमिलनाडु से गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक आर्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें इलैया राजा का गायन और पुस्तक विमोचन शामिल है।
संगमम की शुरूआत इस महीने की 17 तारीख को उस समय हुई थी जब तमिलनाडु से करीब दो सौ प्रतिनिधियों के पहले बैच ने अपनी यात्रा शुरू की और वह कल रात वाराणसी रेलवे स्टेशन पहुंचा। स्टेशन पर प्रतिनिधियों का भव्य स्वागत किया गया।
संगमम का आयोजन भारत सरकार आजादी का अमृत महोत्सव एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढावा देने के उद्देश्य से कर रही है।
संगमम का उद्देश्य देश के दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण और प्राचीन अध्ययन केंद्रों – तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने संबंधों को उजागर करना है। काशी तमिल संगमम का लक्ष्य दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, दार्शनिकों, व्यापारियों, कारीगरों, कलाकारों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से सम्बद्ध लोगों को एक-दूसरे स्थान पर यात्रा करने का अवसर प्रदान करना है। इससे वे इन केंद्रों से संबंद्ध जानकारी, संस्कृति और श्रेष्ठ पद्धतियों के बारे में अपने अनुभव साझा कर सकेंगे।
यह कवायद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के भी अनुरूप है जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली सम्पदा और आधुनिक ज्ञान प्रणाली को एकीकृत करने पर बल दिया गया है। महीने भर चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु से 12 अलग-अलग श्रेणियों के ढाई हजार से अधिक प्रतिनिधि आठ बैचों में काशी की यात्रा करेंगे।
