सबसे समृद्ध सात लोकतांत्रिक देशों के समूह, जी-7 ने रूस से यूक्रेन पर हमला न करने को कहा है। इन देशों ने किसी भी तरह के हमले की स्थिति में कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। समूह ने वार्ता के लिए रूस से आगे आने का आग्रह किया। ब्रिटेन, अमरीका, फ्रांस, इटली, जर्मनी, जापान और कनाडा के विदेश मंत्रियों की ब्रिटेन के लीवरपूल शहर में बैठक हुई। चीन की सैन्य और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं, ईरान को परमाणु हथियारों के मार्ग से दूर रखने संबंधी वार्ता के विफल रहने की संभावना और यूक्रेन सीमा पर रूस के सैनिकों के जमावड़े के मद्देनजर जी-7 देशों की बैठक बुलाई गई थी। अमरीकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने वार्ता को गहन बताते हुए कहा कि रूस के साथ तनाव को कम करने के लिए अब भी राजनयिक रास्ते बाकी हैं।
संकट के केन्द्र में मौजूद यूक्रेन ने रूस पर आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई के लिए उसके हजारों सैनिक तैयार हैं। हालांकि रूस ने किसी भी हमले की योजना बनाने से इंकार करते हुए यूक्रेन और अमरीका पर अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे अपनी रक्षा करने के लिए सुरक्षा गारंटी की जरूरत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर कब्जा करने की कोशिश की तो उसे गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। कल विलमिंग्टन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए जो बाइडेन ने कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन पर नियंत्रण करने की स्थिति में वहां अमेरिकी सेना को भेजे जाने की संभावना कभी नहीं थी, लेकिन पूर्वी नेटो देशों की सुरक्षा के लिए नेटो देशों को वहां और सेना भेजनी पड़ेगी। जो बाइडेन ने पिछले सप्ताह रूसी राष्ट्रपति से टेलीफोन पर बात कर स्पष्ट किया था कि यूक्रेन पर आक्रमण की स्थिति में विश्व में रूस की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव आ जाएगा।