सर्वोच्च न्यायालय ने कथित कौशल विकास घोटाला मामले में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने के मामले में अलग-अलग फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने माना कि प्रावधान लागू होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए के तहत मंजूरी प्राप्त करनी होगी, ऐसा न करने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक लोक सेवक के खिलाफ जांच अवैध होगी। न्यायमूर्ति बाला त्रिवेदी ने कहना था कि धारा 17 ए केवल भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संशोधित और नये शामिल किये गये अपराधों पर लागू होगा। याचिका को अब उचित निर्देश के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया है। एन चंद्रबाबू नायडू 52 दिनों की न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 31 अक्टूबर, 2023 से जमानत पर हैं।
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