संसदीय प्रणाली में विवेक, बुद्धिमानी और शिष्‍टाचार को बनाये रखने के लिए लोक लेखा समिति का महत्पूर्ण स्थान है: राष्ट्रपति कोविंद

संसदीय प्रणाली में विवेक, बुद्धिमानी और शिष्‍टाचार को बनाये रखने के लिए लोक लेखा समिति का महत्पूर्ण स्थान है: राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा है कि संसदीय प्रणाली में विवेक, बुद्धिमानी और शिष्‍टाचार को बनाये रखने के लिए लोक लेखा समिति-पीएसी का महत्पूर्ण स्थान है। संसद के केन्‍द्रीय कक्ष में आयोजित लोक लेखा समिति के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि गांधीजी ने सार्वजनिक जीवन में साफ-सुथरी छवि के लिए लेखा-जोखा रखना आवश्यक माना।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि लोक लेखा के दर्शन को कौटिल्य के समय से ही नहीं बदला गया है। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि लोक लेखा समिति की रिपोर्ट हमेशा व्यवस्था में सुधार का प्रयास करती है। उपराष्ट्रपति नायडू ने सुझाव दिया कि संसद की बैठक एक वर्ष में सौ दिन की होनी चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि लोक लेखा समिति संसद की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक है। उन्‍होंने पीएसी सदस्यों को समर्पित भाव से काम करने के लिए बधाई दी।

आज हमारी संसद और देश की सभी लोकतांत्रिक संस्‍थाओं के लिए एक महत्‍वपूर्ण अवसर है। जब भारत की संसद की लोक लेखा समिति की स्‍थापना के शताब्‍दी वर्ष समारोह में हम शामिल हो रहे हैं। लोक लेखा समिति संसद की सबसे महत्‍वपूर्ण और प्रभावशाली समिति के रूप में से एक है। इसने अपने स्‍थापना काल से ही लोकतांत्रिक संस्‍थाओं के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही को सुनिश्चित करने का काम किया है।

लोक लेखा समिति के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पीएसी सरकारी धन की पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समिति हमेशा निष्पक्ष तरीके से काम करती है।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर समिति के एक सौ गौरवशाली वर्षों पर प्रकाशित एक विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया। राष्ट्रपति कोविंद ने 1921 से 2021 तक पीएसी के ऐतिहासिक क्षणों को दर्शाने वाली एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।

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