लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कर्नाटक विधानसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। संसदीय लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए देश को ‘जनता के लिए जनता के द्वारा’ नियत संविधान के तहत अब तक तय हुई यात्रा पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने जो संसदीय लोकतंत्र चुना, उसमें विचार-विमर्श, चर्चा, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और देश के नागरिकों के मुद्दे उठाने पर बल दिया गया है।
हाल में संसदीय कार्यवाही में गतिरोध पैदा करने की कोशिशों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता चाहती है कि संसद में काम हो। सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और व्यापक विचार-विमर्श के बाद कानून बनें। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुछ सदस्य, सदन में नारेबाजी और शोर-शराबे के बल पर काम-काज को बाधित करते हैं, उससे संसदीय लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी राजनीतिक दलों को मिल-बैठ कर एक ऐसा अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए, जिसमें परस्पर विचार-विमर्श और संवाद संभव हो।
संसद में कानून पारित किए जाते समय शिष्टाचार और आचरण के पालन पर भी उन्होंने बल दिया। कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येडियुरप्पा को सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार भी लोकसभा अध्यक्ष ने प्रदान किया। कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष के भाषण का बहिष्कार किया जबकि जनता दल (एस) सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी सहित इस आयोजन में भारतीय जनता पार्टी विधायकों के साथ हिस्सा लिया।