राज्यसभा ने आज विस्तृत चर्चा के बाद ‘डाकघर विधेयक 2023’ पारित कर दिया। यह विधेयक भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 का स्थान लेगा। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार सरकार, सुरक्षा सहित विशेष कारणों से डाक से भेजी गई किसी भी सामग्री को जांच के लिए रोक सकती है।
विधेयक पर बहस का उत्तर देते हुए केन्द्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह विधेयक देश में डाक सेवा नेटवर्क का विस्तार करने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह पासपोर्ट सेवाओं और डाक विभाग द्वारा संचालित आधार नामांकन सेवाओं को एक कानूनी रूपरेखा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इस समय डाकघर बचत बैंक में 26 करोड़ से अधिक खाते हैं, जिनमें 17 लाख करोड़ रुपये जमा हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय डाक देश के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है और पिछले नौ वर्षों में सरकार ने इस विभाग में काफी सुधार किए हैं। उन्होंने डाक विभाग के निजीकरण की आशंका से इनकार किया।
कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने चर्चा की शुरुआत की और आरोप लगाया कि सरकार केवल निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने डाक विभाग में खेल कोटा आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर गोपनीयता के अधिकार से समझौता किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि यह सरकार को सुरक्षा के नाम पर किसी का भी पत्र पढ़ने का अधिकार देगा। संचार राज्य मंत्री देवूसिंह चौहान ने कहा कि सरकार को डाक से मादक पदार्थ सहित गैर-कानूनी सामग्री भेजे जाने पर पूरी निगरानी रखने का अधिकार है और यह जनहित में है। भाजपा के सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी, घनश्याम तिवारी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की डॉ. फौजिया खान और ऑल इंडिया अन्ना डीएमके पार्टी के एम. थंबीदुरई ने भी विधेयक पर चर्चा की।