प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि कोविड टीकाकरण की सफलता भारत के सामर्थ्‍य को दर्शाती है

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि कोविड टीकाकरण की सफलता भारत के सामर्थ्‍य को दर्शाती है। उन्‍होंने कहा कि सौ करोड़ वैक्‍सीन डोज़ के बाद आज देश नए उत्‍साह, नई ऊर्जा से आगे बढ़ रहा है।

आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सौ करोड़ टीके लगाने की इस सफलता के साथ लाखों प्रेरक प्रसंग जुड़े हुए हैं। इस अभियान की सफलता में हमारे स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों ने अपने अथक परिश्रम और संकल्‍प से एक नई मिसाल पेश की। उन्‍होंने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य कार्मिकों ने नवाचार के साथ मानवता की सेवा का नया कीर्तिमान स्‍थापित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्‍तराखंड के बागेश्‍वर की स्‍वास्‍थ्‍य कार्मिक पूनम नोटियाल से बातचीत की। जिन्‍होंने अपने क्षेत्र में टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया।

प्रधानमंत्री ने आगामी रविवार को सरदार पटेल की जयंती को ध्‍यान में रखते हुए स्‍वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री, लौह पुरूष सरदार पटेल को नमन किया। उन्‍होंने लोगों का आह्वान किया कि सरदार पटेल की जयंती को राष्‍ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते समय एकता का संदेश देने वाली किसी ना किसी गतिविधि से अवश्‍य जुड़े। उन्‍होंने युवाओं को आह्वान किया कि वे सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा हाल ही में प्रकाशित सरदार पटेल की चित्रात्‍मक जीवनी जरूर पढ़े।

प्रधानमंत्री ने जीवन में गीत-संगीत, कला और संस्‍कृति के महत्‍व की चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने अमृत महोत्‍सव में भी कला, संस्‍कृति, गीत और संगीत के रंग भरने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संस्‍कृति मंत्रालय ने देशभक्ति के गीतों, रंगोली और लोरी की तीन प्रतियोगिताएं शुरू करने का फैसला किया है। ये प्रतियोगिताएं 31 अक्‍तूबर को सरदार पटेल की जयंती से शुरू होने जा रही है। उन्‍होंने कहा कि इस बारे में संस्‍कृति मंत्रालय सारी जानकारी देगा। उन्‍होंने युवाओं से कहा कि वे देशभक्ति के गीत लिखकर अमृत महोत्‍सव कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि ये गीत मातृभाषा, राष्‍ट्रभाषा और अंग्रेजी में भी लिखे जा सकते हैं। लेकिन ये जरूरी है कि ये रचनाएं नए भारत की नई सोच वाली हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दिनों हम अमृत महोत्‍सव में देश के वीर-वीरांगनाओं का स्‍मरण कर रहे हैं। आगामी 15 नवंबर को ऐसे ही एक महापुरूष, वीर योद्धा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती है। उन्‍हें धरती आबा अर्थात् धरती पिता कहा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्‍वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान की याद दिलाई। उन्‍होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बिरसा मुंडा के बारे में पढ़े और जानकारी हासिल करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 24 अक्‍तूबर को हर वर्ष संयुक्‍त राष्‍ट्र दिवस मनाया जाता है। इसी दिन संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्‍थापना हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने आजादी से पहले 1945 में ही संयुक्‍त राष्‍ट्र के चार्टर पर हस्‍ताक्षर कर दिए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि भारतीय महिलाओं ने संयुक्‍त राष्‍ट्र का प्रभाव और शक्ति बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्‍होंने कहा कि 1947-48 में जब संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार का यूनिवर्सल घोषणापत्र तैयार हो रहा था, तो उसमें लिखा जा रहा था कि सभी पुरूष समान है, लेकिन भारत की एक प्रतिनिधि हंसा मेहता ने इस पर आपत्ति जताई और उनके सुझाव पर यह लिखा गया कि सभी मानव समान हैं। श्री मोदी ने कहा कि स्‍त्री-पुरूष समानता की यह बात भारत की सदियों पुरानी परंपरा के अनुरूप थी। प्रधानमंत्री ने एक अन्‍य भारतीय प्रतिनिधि लक्ष्‍मी मेनन की भी चर्चा की, जिन्‍होंने लिंग समानता के मुद्दे पर अपने स्‍पष्‍ट विचार व्‍यक्‍त किए थे। उन्‍होंने कहा कि 1953 में विजयलक्ष्‍मी पंडित संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा की पहली महिला अध्‍यक्ष बनी थीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने सदैव विश्‍व शांति के लिए काम किया है। उन्‍होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारत 1950 के दशक से लगातार संयुक्‍त राष्‍ट्र शांति मिशन का हिस्‍सा रहा है। उन्‍होंने कहा कि भारत ने गरीबी हटाने, जलवायु परिवर्तन और श्रमिकों से संबंधित मुद्दों के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्‍होंने कहा कि भारत योग और आयुष को लोकप्रिय बनाने के लिए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के साथ मिलकर काम कर रहा है। मार्च, 2021 में डब्‍ल्‍यूएचओ ने घोषणा की थी कि भारत में पारंपरिक चिकित्‍सा के लिए एक ग्‍लोबल सेंटर स्‍थापित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शब्‍दों की याद दिलाई। 1977 में उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र को हिंदी में संबोधित कर इतिहास रच दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अटल जी के उस संबोधन का एक अंश उद्धृत किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही 21 अक्‍तूबर को पुलिस स्‍मृति दिवस मनाया गया। उन्‍होंने कहा कि पहले यह माना जाता था कि सेना और पुलिस जैसी सेवा केवल पुरूषों के लिए होती है, लेकिन आज ऐसा नहीं है। उन्‍होंने कहा कि पुलिस अनुसंधान और विकास ब्‍यूरो के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्‍या दोगुनी हो गई है। उन्‍होंने बताया कि 2014 में महिला पुलिसकर्मियों की संख्‍या एक लाख पांच हजार के करीब थी, जो 2020 में बढ़कर दो लाख 15 हजार हो गई।

उन्‍होंने कहा कि केंद्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों में भी पिछले सात वर्षों में महिलाओं की संख्‍या बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश की बेटियां कठिन से कठिन ड्यूटी भी पूरी ताकत और हौसले से कर रही हैं। उन्‍होंने कहा कि कई बेटियां सबसे कठिन माने जाने वाले प्रशिक्षणों में से एक विशेषज्ञतापूर्ण जंगलयुद्ध कमांडो का प्रशिक्षण ले रही हैं।

उन्‍होंने कहा कि इसका सबसे सकारात्‍मक असर हमारे पुलिसबल के साथ-साथ समाज के मनोबल पर भी पड़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी से लोगों में, विशेषकर महिलाओं में सहज ही एक विश्‍वास पैदा होता है।

प्रधानमंत्री ने ड्रोन टेक्‍नोलॉजी की भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि भारत, दुनिया के उन पहले देशों में है, जो ड्रोन की मदद से अपने गांव में जमीन के डिजिटल रिकार्ड तैयार कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि इस साल 25 अगस्‍त को देश ने ड्रोन से जुड़ी वर्तमान और भविष्‍य की संभावनाओं को ध्‍यान में रखकर नई ड्रोन नीति तैयार की। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि नई ड्रोन नीति के बाद कई र्स्‍टाट-अप्स में विदेशी और देसी निवेशकों ने निवेश किया है। कई कंपनियां मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट्स भी लगा रही है। उन्‍होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना ने भारतीय ड्रोन कंपनियों को पांच सौ करोड़ रूपये से ज्‍यादा के ऑर्डर भी दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार देश को ड्रोन टेक्‍नोलॉजी में अग्रणी बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

स्‍वच्‍छ भारत मिशन की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपील की कि वे प्‍लास्टिक के एकल इस्‍तेमाल के खिलाफ संकल्‍प लें। उन्‍होंने कहा कि स्‍वच्‍छता का अर्थ सिर्फ दिवाली पर घरों की सफाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पास-पड़ोस भी स्‍वच्‍छ होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जहां सफाई है, वहां स्‍वास्‍थ्‍य है, जहां स्‍वास्‍थ्‍य है, वहां सामर्थ्‍य है और जहां सामर्थ्‍य है, वहां समृद्धि है। उन्‍होंने रांची के निकट स्थित एक गांव सपारोम नया सराय के बारे में बताया। उन्‍होंने कहा कि गांव में एक तालाब हुआ करता था, लेकिन लोग तालाब की जगह का इस्‍तेमाल खुले में शौच के लिए करने लगे थे। स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत जब सबके घर में शौचालय बन गया, तो गांव वालों ने मिलकर तालाब के स्‍थान पर पार्क बना दिया। उन्‍होंने कहा कि आज वह सभी के लिए एक सार्वजनिक स्‍थल बन गया है।

प्रधानमंत्री ने उत्‍तर प्रदेश में अनेक तालाबों को स्‍वच्‍छ बनाने में योगदान के लिए गाजियाबाद के रामवीर तंवर की भी सराहना की। लोग उन्‍हें पोंड मैन के नाम से जानते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने त्‍यौहार के अवसर पर खरीदारी करते समय लोगों को वोकल फॉर लोकल की भी याद दिलाई। उन्‍होंने कहा कि लोगों के लोकल खरीदने से स्‍थानीय कारीगरों और बुनकरों के घर में भी रोशनी आएगी।

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