प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि देशभर में पंचायत से संसद तक अमृत महोत्सव की गूंज है और इस महोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों का सिलसिला लगातार चल रहा है। मन की बात कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि महोत्सव से संबंधित कार्यक्रम सफलतापूर्वक जारी है। आजादी में जनजातीय समुदाय के योगदान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल ही में हमने जनजातीय गौरव सप्ताह मनाया। उन्होंने पिछले दिनों स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी गाथाओं के बारे में नई दिल्ली में आयोजित बच्चों के एक कार्यक्रम – आजादी की कहानी बच्चों की जुबानी की विशेष रूप से चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का महारत्न ओएनजीसी कुछ अलग तरीके से अमृत महोत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी इन दिनों ऑयल फील्ड्स में अपने विद्यार्थियों के लिए स्टडी टूअर्स का आयोजन कर रहा है। इन टूअर्स में युवाओं को ओएनजीसी के फील्ड्स ऑपरेशंस की जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि हमारे उभरते इंजीनियर राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में पूरे जोश और जूनून के साथ हाथ बटा सके।
प्रधानमंत्री ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में जारवा और ओंगे जैसे जनजातीय समुदायों की चर्चा की, जिन्होंने अपनी संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि ऊना के मिनिएचर राइटर रामकुमार जोशी ने उस डाक टिकट पर नेता जी सुभाषचंद्र बोस और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के अनोखे स्कैच बनाए है। उन्होंने मध्य प्रदेश के कटनी से कई लोगों की सराहना की जिन्होंने दास्तानगोई कार्यक्रम के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन लोगों ने रानी दुर्गावती के अदम्य साहस पर बलिदान की यादें ताजा की। प्रधानमंत्री मोदी ने काशी में हुए तीन दिन के उत्सव की भी चर्चा की। इस कार्यक्रम में गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, संत रविदास, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद जैसी महान विभूतियों की चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम की पिछली कड़ी में घोषित तीन प्रतियोगिताओं की चर्चा की। इनमें से एक देशभक्ति के गीत लिखने, दूसरी देशभक्ति से जु़ड़ी स्वतंत्रता आंदोलन की घटनाओं की रंगोली बनाना और तीसरी बच्चों के मन में भव्य भारत के सपने जगाने वाली लोरी लिखने से संबंधित प्रतियोगिता थी। प्रधानमंत्री ने आशा प्रकट की कि श्रोताओं ने अपनी प्रविष्टियां इन प्रतियोगिताओं के लिए भेजी होंगी।
प्रधानमंत्री ने इस कड़ी में वृंदावन की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की निवासी जगत तारिणी ने 13 साल वृंदावन में बिताने के बाद यहां से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी कला के माध्यम से एक अद्भुत वृंदावन अपने ही देश में बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने झांसी में बुंदेलखंड के साथ ऑस्ट्रेलिया के विशेष रिश्ते की भी चर्चा की। उन्होंने बताया झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जब ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ रही थी तो उनके वकील जॉन लैंग मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के ही रहने वाले थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीरता केवल युद्ध के मैदान में ही दिखाई जाएं, ऐसा जरूरी नहीं होता। उन्होंने जालौन में पारंपरिक नदी – नून नदी का अस्तित्व बहाल करने में हजारों ग्रामीण और स्थानीय लोगों के स्व-प्रेरित अभियान की चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबके प्रयासों ने मिलकर कठिन कार्य को संभव बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमें स्वयं को भी संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले का एक उदाहरण दिया, जहां आम लोगों ने अपने प्रयासों से कई छोटे-छोटे द्वीपों और टापुओं को समुद्र में डूबने से बचाया। यहां के लोगों और विशेषज्ञों ने प्राकृतिक आपदा से बचने का उपाय प्रकृति के जरिए ही खोजा। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग अब इन टापुओं पर पाल्मेरा के पेड़ लगा रहे हैं। ये पेड़ चक्रवात और तूफानों में भी खड़े रहते हैं और जीवन को सुरक्षा देते हैं। प्रधानमंत्री ने मेघालय का भी एक उदाहरण दिया जहां नदी का पानी इतना साफ है कि हमें उसकी तलहटी दिखती है। उन्होंने कहा कि देश में अनेक ऐसे क्षेत्र है जहां के लोगों ने प्रकृति के साथ मिलकर रहने की जीवनशैली आज भी जीवित रखी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं और विभिन्न कार्यक्रमों के बीच मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी बातें अलग सुख देती है। सरकार के प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रम आयुष्मान भारत से जुड़ी मानवीय संवेदना को उजागर करने के लिए प्रधानमंत्री ने दो लाभार्थियों से बातचीत की। इनमें से एक राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि किस तरह से उन्होंने इस कार्यक्रम के जरिए हृदय रोग से निजात पाने में सफलता प्राप्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा कि वे आयुष्मान भारत के बारे में बताए ताकि उनकी तरह और लोग भी इस कार्यक्रम का लाभ उठा सके।
प्रधानमंत्री ने अन्य लाभार्थी सुखदेवी से भी बातचीत की जिन्होंने घुटनों की समस्या पर इस कार्यक्रम के जरिए काबू पाया। प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा कि वे आयुष्मान भारत योजना के बारे में अपने अनुभव साझा करे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत स्टार्ट-अप के मामले में विश्व में अग्रणी है और स्टार्टअप्स में निवेश हर वर्ष तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने यूनीकॉर्न के बारे में बताया जो एक ऐसा स्टार्टअप है जिसमें कम से कम एक अरब डॉलर यानी करीब सात हजार करोड़ रूपये से अधिक का निवेश होता है। उन्होंने कहा कि 2015 तक देश में मुश्किल से नौ या दस यूनीकॉर्न हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि मात्र दस महीनों में ही भारत में हर दस दिन में एक यूनीकॉर्न बना है। उन्होंने कहा कि 70 से ज्यादा स्टार्ट-अप ऐसे है, जिनका मूल्य एक अरब डॉलर को पार कर गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय युवा स्टार्टअप्स के जरिए वैश्विक समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। उन्होंने इस बारे में एक कामयाब स्टार्ट-अप मयूर पाटिल से बातचीत की, जिन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर प्रदूषण की समस्या का समाधान देने का प्रयास किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव है, जहां लोग रोजगार मांगने का सपना नहीं देख रहे बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे विश्व मंच पर भारत की स्थिति और मजबूत बनेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिसंबर में नौसेना दिवस और सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र 16 दिसंबर को 1971 के युद्ध की स्वर्ण जयंती भी मनाने जा रहा है। उन्होंने देश की सशस्त्र सेनाओं और वीर जवानों का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने आगामी छह दिसंबर को बाबा साहेब अम्बेडकर की पुण्यतिथि का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन देश और समाज के लिए अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए समर्पित किया था। उन्होंने कहा कि देशवासियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे संविधान की मूल भावना, हमसे अपने कर्तव्यों के निर्वहन की भी अपेक्षा करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव के अवसर पर हम सभी को अपने कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को आगाह किया कि कोविड अभी गया नहीं है। उन्होंने कहा कि कोविड का फैलाव रोकने के लिए सावधानी बरतना हम सबकी जिम्मेदारी है।