निर्माण क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश को निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र ने 25 सितंबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मेक इन इंडिया पहल की शुरुआत की थी।
इस पहल का उद्देश्य निवेश को सुविधाजनक बनाना, नवाचारों को बढ़ावा देना और निर्माण संबंधी सर्वोत्तम ढांचा स्थापित करना है। मेक इन इंडिया पहल से आर्थिक वृद्धि और विकास में देश का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन जैसी अनेक योजनाएं देश को निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने में प्रभावी साबित हुई हैं।
हमने प्रोडक्ट लिंक इन्सेन्टिव स्कीम को इन्ट्रोडयूस किया है और इस योजना के अंतर्गत भारत कैसे एक मैन्यूफैक्चिरिंग और एक्पोर्ट हब बने। इसके लिए हम प्रोडक्शन वैल्यू पर पांच से छह प्रतिशत का इन्सेन्टिव दे रहे हैं। हमारे जो इस वर्ष की बजट घोषणा रही उसमें एक लाख 97 हजार करोड़ का हमने एक आउटले भी इसके लिए घोषणा की है। इसके अलावा जो वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट है उसमें हमे देखा कि भारत ने कैसे 142वीं पोजिशन से 63वीं पोजिशन की उछाल दिखाई है।
मेक इन इंडिया संबंधी पहलों से पिछले सात वर्ष में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक का सर्वाधिक 81 अरब 72 करोड़ डॉलर का वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। इन सात वर्षों में भारत में 440 डॉलर का प्रत्य़क्ष विदेशी निवेश हुआ।