केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आतंकवादी हिंसा फैलाने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और वित्तीय संसाधन जुटाने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अमित शाह ने आज हरियाणा के गुरुग्राम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेटावर्स और एनएफटी के युग में अपराध तथा साइबर सुरक्षा पर जी-20 सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवादियों द्वारा वित्तीय लेनदेन के लिए नए तरीके तथा नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे सुरक्षा तंत्र तथा डिजिटल ढांचे के लिए खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व और वैश्विक ताकतें द्वारा नागरिकों तथा सरकारों को आर्थिक एवं सामाजिक नुकसान पहुंचाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘डायनामाइट से मेटावर्स’ और ‘हवाला से क्रिप्टोकरेंसी’ तक सुरक्षा चुनौतियों में बदलाव चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी साइबर हमले, महत्वपूर्ण व्यक्तिगत डाटा की बिक्री, ऑनलाइन उत्पीड़न और बाल शोषण से लेकर फेक न्यूज तथा टूलकिट के माध्यम से दुष्प्रचार अभियान चला रहे हैं। उन्होंने परस्पर जुड़ी दुनिया में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने इस समस्या से प्रभावशाली ढंग से निपटने के लिए साझा रणनीति बनाने का भी आग्रह किया।
पिछले नौ वर्षों के दौरान डिजिटल क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल लेनदेन में दुनिया में अग्रणी देशों में है और 2022 में देश में नौ करोड़ लेन-देन डिजिटल माध्यम से हुए। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन के भारतीय मॉडल दुनिया में उदाहरण के रूप में सामने आए हैं। अमित शाह ने कहा कि जी-20 समूह में साइबर सुरक्षा पर यह पहला सम्मेलन है। अब तक जी-20 में डिजिटल बदलाव तथा आर्थिक दृष्टिकोण से डाटा के प्रवाह पर जोर रहता था लेकिन अब अपराध तथा सुरक्षा का पहलू और इसका समाधान निकालना भी जरूरी है। इस मौके पर अमित शाह ने देश के सात प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से साइबर स्वयंसेवी दस्तों को भी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये स्वयंसेवी समाज में साइबर जागरूकता फैलाने तथा हानिकारक विषयवस्तु की पहचान कर समाज को साइबर रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने इस मौके पर एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।