केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने H3N2 इन्फ्लुएंजा वायरस के बढ़ते मामलों की समीक्षा के लिए एक बैठक की। राज्यों को अलर्ट पर रहने और स्थिति की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी की गई। भारत सरकार स्थिति से निपटने के लिए राज्यों के साथ काम कर रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को बढ़ा रही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में मौसमी इन्फ्लुएंजा की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। अब तक कर्नाटक और हरियाणा ने H3N2 इन्फ्लूएंजा से एक-एक मौत की पुष्टि की है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एकीकृत बीमारी निगरानी कार्यक्रम के माध्यम से देशभर में मौसमी इन्फ्लुएंजा की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि मौसमी इन्फ्लुएंजा की उपश्रेणी एच-3 एन-2 के कारण गम्भीर स्थिति और मृत्यु पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। मंत्रालय ने कहा है कि अभी तक एच-3 एन-2 इन्फ्लुएंजा से कर्नाटक और हरियाणा में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि हुई है। बच्चे और गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्ग लोगों को मौसमी इन्फ्लुएंजा से ज्यादा खतरा है। मंत्रालय ने कहा है कि मार्च के अंत से मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में गिरावट आने की उम्मीद है। राज्य निगरानी अधिकारी जन स्वास्थ्य की स्थिति पर नजदीक से नजर रख रहे हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने संक्रमण से बचाव और इसके नियंत्रण के लिए परामर्श जारी किये हैं। इनमें कहा गया है कि लोगों को साबुन से हाथ धोने चाहिए। इसके अलावा पीडि़त लोगों को मास्क पहनना चाहिए और भीड़भाड़ में नहीं जाना चाहिए। पीडि़त लोगों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने चाहिए और बुखार तथा बदन दर्द होने पर पैरासिटामोल लेनी चाहिए। लोगों को एंटीबायटिक दवाएं नहीं लेनी चाहिए और अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के अनुरूप ओसेल्तामिविर दवा निशुल्क उपलब्ध है। राज्यों को पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद कोई भी आपात स्थिति होने पर केन्द्र सरकार हरसंभव सहायता उपलब्ध करायेगी। नीति आयोग सभी राज्यों में मौसमी इन्फ्लुएंजा की स्थिति पर कल अंन्तर-मंत्रालयी बैठक करेगा।