सरकार ने एक राष्‍ट्र-एक चुनाव की संभावनाओं का पता लगाने के लिए आठ सदस्‍यों वाली एक उच्‍चस्‍तरीय समिति का गठन किया

सरकार ने एक राष्‍ट्र-एक चुनाव की संभावनाओं का पता लगाने के लिए आठ सदस्‍यों वाली एक उच्‍चस्‍तरीय समिति का गठन किया

सरकार ने एक राष्‍ट्र-एक चुनाव की संभावनाओं का पता लगाने के लिए आठ सदस्‍यों वाली एक उच्‍चस्‍तरीय समिति का गठन किया है। पूर्व राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद को समिति का अध्‍यक्ष बनाया गया हैं। गृहमंत्री अमितशाह, कांग्रेस सासंद अधीर रंजन चौधरी, राज्‍य सभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, 15वें वित्‍त आयोग के पूर्व अध्‍यक्ष और कुछ अन्‍य वरिष्‍ठ लोगों को समिति का सदस्‍य नियुक्‍त किया गया है। केन्‍द्रीय विधि और न्‍याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समिति की बैठकों में विशेष आंमत्रित सदस्‍य के रूप में उपस्थित रहेंगे।

देश में 1951-52 से लेकर 1967 तक विधान सभा और लोकसभा चुनाव एक साथ होते रहे थे। लेकिन इसके बाद यह क्रम टूट गया। नवगठित समिति संविधान की व्‍यवस्‍थाओं के तहत देश में लोकसभा, विधानसभा, नगर निकायों और पंचायत चुनावों को एक साथ कराने की संभावनाओं का पता लगाएगी और इस संबंध में अपने सुझाव देगी। वह इस बात की समीक्षा करेगी कि एक राष्‍ट्र – एक चुनाव के लिए संविधान में किए जाने वाले संशोधनों के लिए राज्‍यों का अनुमोदन जरूरी होगा या नहीं। समिति इसके अलावा चुनाव के समय और विभिन्‍न चरणों के बारे में भी अपने सुझाव सरकार को देगी। वह एक राष्‍ट्र – एक चुनाव की व्‍यवस्‍था के लिए जरूरी मानव संसाधन के साथ ही इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और वी.वी.पैट की उपलब्‍धता का भी पता लगाएगी।

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