केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुवाहाटी में पटना से बांग्लादेश होते हुए पांडु तक खाद्यान्न की पहली जलयात्रा का स्वागत किया। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और गुवाहाटी से लोकसभा के सांसद क्वीन ओजा के साथ भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के अध्यक्ष संजय बंदोपाध्याय समारोह में शामिल हुए और उन्होंने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के लिए कुल 200 मीट्रिक टन खाद्यान्न ले जाने वाले स्व-चालित जहाज एमवी लाल बहादुर शास्त्री का स्वागत किया, क्योंकि इसने पटना से पांडु तक बांग्लादेश के रास्ते पहला पायलट रन पूरा किया। असम और पूर्वोत्तर भारत के लिए अंतर्देशीय जल परिवहन के एक नए युग की शुरुआत करते हुए आईडब्ल्यूएआई एनडब्ल्यू1 और एनडब्ल्यू 2 के बीच एक निर्धारित अनुसूचित नौकायन की योजना बना रहा है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति के तहत बांग्लादेश के रास्ते ऐतिहासिक व्यापार मार्गों को फिर से जीवंत करने के निरंतर प्रयास को प्रोत्साहन मिला है। यह कल्पना की गई है कि पूर्वोत्तर धीरे-धीरे कनेक्टिविटी हब के रूप में परिवर्तित हो जाएगा। पीएम गति शक्ति के तहत एकीकृत विकास योजना की कल्पना की गई है, ताकि ब्रह्मपुत्र में कार्गो की तेजी से आवाजाही हो सके।
आईडब्ल्यूएआई भी इन मार्गों पर एक नियमित अनुसूचित सेवा चलाने की योजना बना रहा है। भारत और बांग्लादेश के बीच अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार (पीआईडब्ल्यूटीटी) पर प्रोटोकॉल बेहतर रूप से फायदेमंद होगा, जब हम इस क्षेत्र में कार्गो व्यापार को बढ़ाने पर काम करेंगे। नौवहन क्षमता में सुधार के लिए आईबीपी मार्गों के दो हिस्सों, सिराजगंज-दाईख्वावा और आशुगंज-जकीगंज को भी 80:20 अनुपात (80 प्रतिशत भारत द्वारा और 20 प्रतिशत बांग्लादेश द्वारा वहन किया जा रहा है) के आधार पर 305.84 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इन हिस्सों के विकास से आईबीपी मार्ग के माध्यम से एनईआर को निर्बाध नौवहन होने की उम्मीद है। सात वर्षों (2019 से 2026 तक) की अवधि के लिए जहाजों को अपेक्षित गहराई प्रदान करने और इसे बनाए रखने के लिए दो हिस्सों पर अनुबंध के तहत तल को गहरा करने (ड्रेजिंग) के काम चल रहे हैं। आईबीपी रूट नंबर 5 और 6 भारत में फरक्का के पास मेया से बांग्लादेश में अरिचा तक एनडब्ल्यू1 से एनडब्ल्यू2 (पूर्वोत्तर क्षेत्र) को जोड़ने वाली आईडब्ल्यूटी दूरी लगभग 1,000 किमी कम हो जाएगी, जिससे समय और लागत भी काफी हद तक घट जाएगी।
प्रधानमंत्री की एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के माध्यम से राष्ट्रीय जलमार्ग-1, भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और एनडब्ल्यू2 पर कई आधारभूत सुविधाओं से संबंधित परियोजनाएं शुरू की हैं। इन कदमों से जलमार्गों के माध्यम से उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) के साथ संपर्क में सुधार होगा। सरकार ने 2,000 टन तक के जहाजों की सुरक्षित और सतत आवाजाही के लिए एनडब्ल्यू 1 (गंगा नदी) की क्षमता वृद्धि को लेकर लगभग 4,600 करोड़ रुपये के निवेश के साथ महत्वाकांक्षी जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) शुरू की है।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों के लिए विकास के एक नए युग की शुरुआत करेगी। यह जलमार्ग उन भूबंधित क्षेत्रों से होकर जाएगा, जो लंबे समय से विकास के संबंध में पिछड़ा हुआ है। यह जलमार्ग न केवल इस क्षेत्र में प्रगति की राह में इस भौगोलिक बाधा को दूर करता है, बल्कि व्यापार व क्षेत्र के लोगों के लिए एक सस्ता, तेज और सुविधाजनक परिवहन भी प्रदान करता है।
बैठक में आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष संजय बंदोपाध्याय के साथ श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह के अध्यक्ष विनीत कुमार और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे।