लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद सुरक्षा चूक मामले पर सभी सांसदों को पत्र लिखा। उन्होंने लिखा, “घटना की गहन जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। मैंने एक उच्च शक्ति वाली समिति का गठन भी किया है जो संसद परिसर में सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करेगी कि इस तरह घटनाएं पुनरावृत्ति नहीं करती हैं।”
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “ऐसा क्यों हुआ? देश में मुख्य मुद्दा बेरोजगारी है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के कारण देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और इसके पीछे (इस घटना का) कारण बेरोजगारी और महंगाई है।”
भाजपा सांसद स्मृति ईरानी ने कहा, “लोकसभा सांसद के नाते ये मेरा अनुभव रहा है कि बिना किसी पक्षपात के लोकसभा अध्यक्ष ने राष्ट्र के हर मुद्द पर सभी पक्ष के नेताओं को अपना पक्ष रखने का मौका दिया। सांसद होने के नाते हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम सदन की गरिमा को आहत ना करें। लोकसभा के स्पीकर किसी पक्ष के नहीं, राष्ट्र के हैं। पत्र में ये दुख भी दिखाई दिया कि जिन सांसदों का निलंबन इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने सदन की मर्यादा को छिन्न-भिन्न किया। उस कार्रवाई को भी एक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “जिन संसद सदस्यों को निलंबित किया गया उसका इस घटना(संसद सुरक्षा चूक) से कोई संबंध नहीं है। ये दोनों अलग-अलग विषय हैं। इस पत्र में ये भी लिखा है कि संसद सदस्यों का निलंबन इसलिए हुआ क्योंकि वह सदन में पोस्टर लेकर आए और उन्होंने संसद को सुचारू रूप से चलने नहीं दिया। विरोध करने के तरीके हैं देशवासियों का विश्वास टूट रहा है कि अगर इस प्रकार से विपक्ष संसद नहीं चलने देगा तो उनकी आवाज कैसे सरकार के पास पहुंचेगी।”