ब्रिक्स देशों के वाणिज्य मंत्रियों की 11वीं बैठक को भारत की अध्यक्षता में आभासी प्रारूप में आयोजित की गई।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के वाणिज्य एवं आर्थिक मंत्रियों ने भाग लिया।
केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की आजादी की 75वींवर्षगांठ – ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के समय आयोजित होने वाली इस बैठक के अपने उद्घाटन भाषण में अपने समकक्ष मंत्रियों का स्वागत किया।
कोविड-19 के प्रभावों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने टीकाकरण के मामले में हासिल की गई उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ-साथ इस महामारी के प्रभाव को दूर करने के लिए दी गई महत्वपूर्ण वित्तीय और मौद्रिक सहायता सहित भारत द्वारा की गई विभिन्न तत्काल सहायक कार्रवाइयों का उल्लेख किया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से बहुपक्षीय प्रणाली, जिसके मूल में विश्व व्यापार संगठन है, को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने और विकासशील देशों तथाकम विकसित देशों की विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगामी विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी12) में एक संतुलित और समावेशी निर्णयों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने विशेष एवं विभेदक व्यवहार के सिद्धांतों और “साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारी” पर प्रकाश डाला। उन्होंने अन्य बातों के अलावा, खाद्य सुरक्षा से जुड़े उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक स्टॉक होल्डिंग कार्यक्रमों के स्थायी, पर्याप्त और न्यायसंगत समाधान; टीकों, चिकित्सीय और नैदानिक मामलों में ट्रिप्स संबंधी छूट के प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय; डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ीचुनौतियों का समाधान ढूंढते हुए तेजी से बदलती दुनिया में उभरती हुई नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने; और खपत एवंउत्पादन के टिकाऊ पैटर्न को सुनिश्चित करने की जरूरतपर भी जोर दिया।
पीयूष गोयल ने कहा कि कोविड -19 महामारी और उससे जुड़े यात्रा संबंधी प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न कई चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद भारत ब्रिक्स देशों के बीच कार्य और सहयोग के नए क्षेत्रों के लिए आम सहमति बनाने में सफल रहा है। विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी-12)के लिए बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के मुद्दे पर एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने जैसी अन्य बातों के अलावा ब्रिक्स देशों के बीच पहली बार साझा समझ के परिणाम स्वरूप उपभोक्ता संरक्षण, ई-कॉमर्स, आनुवांशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान, व्यावसायिक सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित कई नई घोषणाएं हुईं।
ब्रिक्स देशों ने घरेलू क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने, ब्रिक्स देशों के भीतर पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा देने में भागीदारी और ब्रिक्सदेशों के भीतर व्यावसायिक सेवाओं को बढ़ाने के उद्देश्यों के साथ व्यावसायिक सेवाओं के व्यापार में सहयोग से संबंधित रूपरेखा का समर्थन किया। यह निश्चित रूप से इस इलाके में आपसी हित के क्षेत्रों या उप-क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।
ब्रिक्स के सभी सदस्यदेशों के बीच पहली बार आनुवांशिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण की दिशा में संयुक्त रूप से काम करने कीआम सहमति बनी ताकि संसाधन की उत्पत्ति के स्रोत के अनिवार्य प्रकटीकरण और पूर्व सूचित सहमति और पहुंच तथा लाभ साझा करने से संबंधित प्रमाण के प्रकटीकरण के माध्यम से इसके दुरुपयोग से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जा सके। इससे इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ मिलकर चलने में भी मदद मिलेगी।
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के उपयोग में तेजी से आए उछाल के इस युग में, ब्रिक्स देशों के बीच एक साझाकार्य योजना तैयार करने के बारे में बनी सहमति उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में व्यावहारिक विकल्पों की खोज को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत द्वारा चुना गया विषय है – ब्रिक्स@15: निरंतरता, समेकन और आम सहमति की दिशा में ब्रिक्स देशों के भीतर सहयोग। इस अवधि के दौरान, भारत ने ब्रिक्स व्यापार मेले के दूसरे संस्करण के (वर्चुअल मोड में) आयोजन सहित विभिन्न गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन किया है। यह व्यापार मेला भारत द्वारा ब्रिक्स देशों के बीच एक अनूठा आयोजन है, जिसमें ब्रिक्स देशों की 600 से अधिक कंपनियों ने अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया। सेवा व्यापार सांख्यिकी से जुड़ी कार्यशालाओं ने सेवाओं के डेटा संकलन पद्धतियों में मौजूद खाई को पाटने के लिए उत्कृष्ट उपायों को साझा करने और एक दूसरे से सीखने में सक्षम बनाया। एमएसएमई गोलमेज सम्मेलन ब्रिक्स देशों के बीच उत्कृष्ट उपायों को सीखने के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े हितों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया था। भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स व्यापार परिषद और ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन के माध्यम से कई बी2बी कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
ब्रिक्स देशों के वाणिज्यमंत्रियों ने इन पहलों के माध्यम से ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए भारत की सराहना की। इन मंत्रियों ने 11वें ब्रिक्स देशों के वाणिज्य मंत्रियों की संयुक्त विज्ञप्ति और भारत द्वारा प्रस्तावित पांच अन्य दस्तावेजों को स्वीकृत किया। ब्रिक्स देशों के माननीय मंत्रियों ने अपने सामानों और सेवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और आगे वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उनका समेकन करने के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में ब्रिक्सदेशों के भीतर आपसी सहयोग को मजबूत करने के महत्व को स्वीकार किया।
पीयूष गोयल द्वारा ब्रिक्स एजेंडा को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स देशों के समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद देने और आगामी जी-20 तथा एमसी-12 के वाणिज्यमंत्रियों की बैठकों में मिलने की उम्मीद व्यक्त करने के साथ इस बैठक का समापन हुआ।