प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल रात 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन और अंतर्राष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इटली और ब्रिटेन की पांच दिन की यात्रा पर रवाना हो गए। यात्रा के पहले चरण में वे रोम जाएंगे, जहां वे कल से शुरू हो रहे दो दिवसीय जी-20 सम्मेलन में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी के निमंत्रण पर इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में जी-20 देशों के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष, यूरोपीय संघ और अन्य आमंत्रित देश तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठन भाग लेंगे।
विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बताया कि जी-20 शिखर सम्मेलन लोग, ग्रह और समृद्धि विषय पर केंद्रित होगा। उन्होंने बताया कि इसमें महामारी, वैश्विक स्वास्थ्य गवर्नेंस, आर्थिक बहाली, जलवायु परिवर्तन तथा ऊर्जा संबंधी बदलाव, सतत विकास और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी रोम के बाद ग्लास्गो जाएंगे। वे वहां, अंतराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन का उच्च स्तरीय सत्र अगले महीने की पहली और दूसरी तारीख को होगा। इसमें 120 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष भाग लेंगे। विदेश सचिव ने बताया कि ये देश पेरिस समझौते के कार्यान्वयन दिशा निर्देशों को पूरा करने, जलवायु संबंधी वित्तीय व्यवस्था को गतिशील बनाने और जलवायु के संबंध में कार्रवाई पर चर्चा करेंगे।
अफगानिस्तान को भारत द्वारा अनाज की पेशकश के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत मानवीय सहायता के मुद्दे पर हमेशा आगे रहा है और यदि इस प्रकार की स्थिति पैदा होती है तो भारत उसी के अनुरूप कार्रवाई करेगा।
जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के प्रधानमंत्री के अलावा कई अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी वेटिकन मिशन पोप फ्रांसिस से भी मुलकात करेंगे। वहीं, ग्लास्गों में प्रधानमंत्री मोदी जलवायु परिवर्तन पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को सम्बोधित करेंगे। यहां उनका एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रीड की सोच के साथ ग्लोबल गीन ग्रीड इनीशिएटीव की शुरूआत करने का भी कार्यक्रम है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के साथ मिलकर द्वीप राष्ट्रों के लिए एक नई पहल की शुरूआत करेंगे। जिसके तहत आपदा का सामना करने के लिए वहां बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इस यात्रा के दौरान उनका ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन के साथ-साथ अन्य राष्ट्रों अन्य राष्ट्रों के प्रमुखों के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम है।