केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की पहली मंत्रिस्तरीय बैठक के अवसर पर आंतरिक व्यापार के लिए यूरोपीय कमिश्नर थियरी ब्रेटन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान, दोनों पक्षों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत तथा यूरोपीय संघ के सहयोग के साथ भविष्य में आगे बढ़ने की पूरक प्रकृति के महत्व का उल्लेख किया। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उचित राजनीतिक प्रतिबद्धता स्थापित की जा सकती है।
पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि भारत ने अगले 25 वर्षों के लिए एक महत्वाकांक्षी विकास पथ पर कदम बढ़ा दिये हैं और इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान कई सतत विकास लक्ष्यों को हासिल किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से लगभग 40% ऊर्जा प्राप्त करने का लक्ष्य साल 2030 की निर्धारित समय-सीमा से बहुत पहले ही प्राप्त कर लिया गया है। भारत ने वर्ष 2030 तक हासिल करने के उद्देश्य से 500 गीगा वाट ऊर्जा के लिए नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन तैयार करने का एक और लक्ष्य निर्धारित किया है। पीयूष गोयल ने कहा कि हम दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आधार अलग-अलग हैं और वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए इससे अधिक जुड़ाव का अवसर प्राप्त होता है। थियरी ब्रेटन द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की संभावना तलाशने के लिए दिये गए सुझाव पर पीयूष गोयल ने बताया कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रमुख शक्तियों में से एक है और दोनों देश इस क्षेत्र में मिलकर काम रख सकते हैं।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत यूपीआई और रूपे कार्ड के साथ फिनटेक के मामले में वैश्विक रूप से अग्रणी बन चुका है। भारत डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के लिए एक खुला नेटवर्क भी लेकर आया है, जिसमें सभी खरीदारों और विक्रेताओं को नेटवर्क में एकीकृत करने की क्षमता है। थियरी ब्रेटन ने जानकारी दी कि यूरोपीय संघ नए डिजिटल सेवा अधिनियम पर कार्य कर रहा है। इस संबंध में पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों पक्ष सूचना प्रौद्योगिकी दिग्गज के रूप में भारत की स्थिति को देखते हुए आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने यह बताया कि भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और उसने जी20 बैठकों में बी20 ट्रैक को शामिल किया है। यह डिजिटल स्पेस और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अधिक जुड़ाव के अवसर प्रदान करता है।
पीयूष गोयल ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) के मुद्दे पर कहा कि इस संबंध में आगे के अध्ययन की आवश्यकता है। यह देखना आवश्यक है कि दोनों पक्षों के उद्यमों पर किस तरह से प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में वृद्धि के कारण व्यापार पर प्रभाव को भी परखा जा सकता है।