जल संकट एक बहुआयामी समस्‍या है जिससे सामूहिक वैश्विक प्रयासों से निपटने की जरूरत है: राष्ट्रपति मुर्मू

जल संकट एक बहुआयामी समस्‍या है जिससे सामूहिक वैश्विक प्रयासों से निपटने की जरूरत है: राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि जल संकट एक बहुआयामी और जटिल मुद्दा है और इससे वैश्विक प्रयासों के माध्यम से निपटने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के विपरीत प्रभाव से जल संरक्षण को गंभीर चुनौती हो गई है। राष्ट्रपति आज उत्तरप्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित भारत जल सप्ताह के सातवें संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहीं थीं। यह सम्मेलन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरूद्वार मंत्रालय ने आयोजित किया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पहले भारत जल संकट का सामना कर रहा था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से केन्द्र सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं से देश में जल की कमी से निपटा जा रहा है।

जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में जल संकट से निपटने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आहवान किया क्योंकि विश्व जलवायु परिवर्तन के कारण कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जल संकट से निपटने में अग्रणी रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में धन का काफी आवंटन किया है। गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारत सभी पक्षकारों को एक मंच पर लाने की पहल कर रहा है ताकि जल संकट के मुद्दे और इस समस्या के समाधान पर विचार-विमर्श किया जा सके।

इस अवसर पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में जल संसाधन व्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने जो काम किया है उसके बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सकारात्मक कार्यक्रमों के लागू होने से राज्य में सिंचाई और पीने के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध है।

हमारे संवाददाता ने बताया है कि एकीकृत तरीके से जल संसाधनों के संरक्षण और उपाय के बारे में जागरूकता पैदा करने के बारे में यह सम्मेलन हो रहा है।

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