उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। तत्पश्चात, उपराष्ट्रपति मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह, जो 1857 के पहले स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान शहीद हुए थे, के ‘बलिदान दिवस’ की स्मृति में आयोजित एक समारोह में भाग लेने के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा कॉलेज परिसर गए।
इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति धनखड़ ने इस तथ्य पर संतोष व्यक्त किया कि हमारे जनजातीय समुदाय के नायकों के योगदान और बलिदान को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह के हिस्से के रूप में पहचाना जा रहा है और उन्हें विशेष महत्व दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में पहली बार किसी जनजातीय महिला को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर देखना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।
यह देखते हुए कि मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि रानी दुर्गावती से लेकर राजा शंकर शाह तक, जनजातीय समुदायों का बाहरी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने स्मारकों और संग्रहालयों के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना की। ये स्मारक और संग्रहालय हमारे जनजातीय नायकों की कहानियों को बताते हैं और इनसे हमारी युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति धनखड़ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर आयोजित एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया और स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे। उपराष्ट्रपति ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास भी किया और जेईई/एनईईटी/सीएलएटी में उत्तीर्ण होने वाले मेधावी जनजातीय छात्रों को सम्मानित किया।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल; मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान; मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश; केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते; मध्य प्रदेश सरकार की जनजातीय कल्याण मंत्री मीना सिंह; मध्य प्रदेश सरकार के वन विभाग मंत्री कुंवर विजय शाह; मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव; राज्यसभा सदस्य सुमित्रा बाल्मीकि; लोकसभा सदस्य वी.डी. शर्मा; लोकसभा सदस्य राकेश सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में शामिल हुए।