आज लोक सेवा प्रसारण दिवस है। यह दिवस वर्ष 1947 में आज ही के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आकाशवाणी दिल्ली आगमन की स्मृति में प्रत्येक वर्ष बारह नवम्बर को मनाया जाता है।
70 वर्ष पहले यह दिपावली का दिन था जब महात्मा गांधी विभाजन के बाद भारत आए शरणार्थियों से मिलने हरियाणा के कुरुक्षेत्र नहीं पहुंच सके। तब उन्होंने रेडियो के माध्यम से अपना संदेश देने का निर्णय लिया। 12 नवम्बर 1947 को गांधी जी ने आकाशवाणी से पहली और अंतिम बार लोगों को संबोधित किया था। गांधी जी ने कहा था कि उन्होंने आकाशवाणी के माध्यम को ईश्वर की चमत्कारिक शक्ति के रूप में देखा। गांधी जी ने अपना संबोधन यह कहकर शुरू कि परेशानियों का सामाना कर रहे मेरे भाइयों और बहनों। मैं नहीं जानता कि सिर्फ आप या और भी लोग मुझे सुन रहे हैं।
आकाशवाणी के अस्तित्व में आने से 13 वर्ष पहले भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत हो चुकी थी। जून 1923 में रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे ने देश का पहला प्रसारण किया था। इसके पांच महीने बाद कलकत्ता रेडियो क्लब की स्थापना की गई थी। अप्रैल 1930 में उद्योग और श्रम विभाग के अंतर्गत भारतीय प्रसारण सेवा ने प्रायोगिक तौर पर संचालन शुरु किया। 8 जून 1936 को यह सेवा आकाशवाणी के नाम से देश के सामने आई।