आज आठवां राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस है

आज आठवां राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस है

आज आठवां राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस है। देश में स्‍वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इसका विशेष महत्‍व है। आज ही के दिन 1905 में स्‍वदेशी आंदोलन की शुरूआत हुई थी। 2015 में राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा था कि देश में सभी परिवार खादी और हथकरघा से जुड़ा कम से कम एक उत्‍पाद आवश्‍य खरीदें।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विशेषकर मेरठ में और पूर्वी उत्तर प्रदेश में वाराणसी, मऊ और आजमगढ़ जिलों में हथकरघा उद्योग से हजारों बुनकर जुड़े हुए हैं जिन्हें भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के बुनकर सेवा केंद्र द्वारा भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है और वह आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मेरठ में बुनकर सेवा केंद्र के उपनिदेशक लालता प्रसाद ने आकाशवाणी समाचार को बताया कि बुनकर सेवा केंद्र में बुनकरों की मदद करने और आधुनिक ट्रेनिंग देने के साथ ही देश विदेश में आयोजित मेलो व कार्यक्रमों में बुनकरों द्वारा बने उत्पाद को बेचने में सहायता भी की जाती है।

हमारे सेवा केंद्र में बुनकरों के लिए कार्यालय के अंदर ही हमारे लैब हैं बुनाई और रंगाई की, जिसमें चार महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है जिसको करके हमारे कोई भी बुनकर प्रशिक्षण लेकर अपना कारोबार कर सकते हैं। भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय विकास आयुक्त हथकरघा की तरफ से जो योजनाएं हैं उनका यहां पर कार्यान्वयन किया जाता है। हथकरघा समागम संहिता इसके अंतर्गत बुनकर भाई-बहनों के पास लूम नहीं और लूम चलाना जानता है, हथकरघा चलाना जानता है, तो भारत सरकार लून खरीदने के लिए 90 प्रतिशत कीमत देती है।

आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

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