हिंदू धर्म में हर देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा विधि और पूजा सामग्रियां अलग-अलग तरह की होती हैं। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ और धार्मिक- मांगलिक कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को विध्नहर्ता कहा गया है इसलिए उनकी पूजा सबसे पहले की जाती है ताकि शुभ कार्य में किसी भी तरह का विध्न न आए। भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास जरूर चढ़ाई जाती है। आइए जानते हैं भगवान गणेश को दूर्वा घास क्यों चढ़ाते हैं क्या है इसके पीछे की कथा।
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कथा
पौराणिक कथा के अनुसार अनलासुर नाम का एक दैत्य हुआ करता था। अनलासुर का आंतक चारों तरफ फैला था। इस दैत्य के आंतक से सारे देवी-देवता बहुत ही परेशान हो गए थे। कोई भी देवता इस राक्षस को मार नहीं पा रहे थे। तब सभी देवता अनलासुर के आंतक से त्रस्त होकर भगवान गणेश की शरण में गए। तब भगवान गणेश ने अनलासुर को निगल लिया था। अनलासुर को निगलने के कारण भगवान गणेशजी के पेट में बहुत जलन होने लगी थी। उनकी इस जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें खाने के लिए दूर्वा घास दी। इसे खाते ही भगवान गणेश के पेट की जलन शांत हो गई। तभी से भगवान गणेश की पूजा में उन्हें दूर्वा चढ़ायी जाने लगी।
दूर्वा चढ़ाने के नियम
भगवान गणेश की पूजा-आराधना में दूर्वा चढ़ाने से सभी तरह के सुख और संपदा में वृद्धि होती है। पूजा में दूर्वा का जोड़ा बनाकर भगवान को चढ़ाया जाता है। दूर्वा घास के 11 जोड़ों को भगवान गणेश को चढ़ाना चाहिए। दूर्वा को चढ़ाने के लिए किसी साफ जगह से ही दूर्वा घास को तोड़ना चाहिए। गंदी जगहों से कभी भी दूर्वा घास को नहीं तोड़ना चाहिए। दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के 11 मंत्रों का जाप करना चाहिए।
गणेश मंत्र
ऊँ गं गणपतेय नम:
ऊँ गणाधिपाय नमः
ऊँ उमापुत्राय नमः
ऊँ विघ्ननाशनाय नमः
ऊँ विनायकाय नमः
ऊँ ईशपुत्राय नमः
ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
ऊँएकदन्ताय नमः
ऊँ इभवक्त्राय नमः
ऊँ मूषकवाहनाय नमः
ऊँ कुमारगुरवे नमः
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