उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक के लिए राज्य की जनसंख्या नीति के प्रारूप की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विश्व जनसंख्या दिवस पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक पुस्तिका जारी करते हुए कहा कि इससे लोगों का जीवन खुशहाल होगा और समाज के सभी वर्गों को जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम से जोड़ना होगा।
जनसंख्या स्थिरीकरण का जो प्रयास है, यह समाज की व्यापक जागरूकता के साथ जुड़ा हुआ है। समाज में जहां गरीबी है, वहां जनसंख्या वृद्धि का उसके साथ एक संबंध हो चुका है और इस चीज से व्यापक जागरूकता का एक अभियान उन सभी तबकों को ध्यान में रखकर के जब तक हम लोग नहीं चलाएंगे, तब तक उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में कठिनाई होगी। तो देश में आबादी के हिसाब से सबसे बड़े इस राज्य के बारे में हमें गौर से सोचना होगा।
राज्य सरकार ने जनसंख्या नीति के मसौदे पर लोगों के विचार आमंत्रित किए हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बढ़ती हुई जनसंख्या समाज में व्याप्त असमानता समेत प्रमुख समस्याओं का मूल है। उन्होंने कहा अधिक जनसंख्या विकास में बाधा है। समुन्नत समाज की स्थापना के लिए जनसंख्या नियंत्रण प्राथमिक शर्त है। उन्होंने लोगों से ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पर बढ़ती समस्याओं के प्रति स्वयं व समाज को जागरूक करने का प्रण करने की अपील की। नीति के मसौदे के अनुसार दो से अधिक बच्चे वाले लोग स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। जिन लोगों की दो तक ही संतानें होंगी, उन्हें और अधिक सरकारी सुविधाएं और प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। मसौदे में यह भी कहा गया है कि दो बच्चों के मानदंड का पालन नहीं करने वाले सरकारी कर्मचारी कई लाभों से वंचित रहेंगे। साथ ही नीति का उल्लंघन करने वाले लोग सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवविवाहितों के बीच परिवार नियोजन के साधनों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘शगुन किट’ भी वितरण शुरू किया।
राज्य में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए भी आज से 15 दिन का एक कार्यक्रम शुरू किया गया है।
