भारत में पुराने सोने के गहनों को नए डिजाइन में बदलवाना आम बात है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह इनकम टैक्स के दायरे में भी आ सकता है. टैक्स नियमों के अनुसार, ज्वेलरी एक्सचेंज को एसेट ट्रांसफर माना जा सकता है, जिस पर कैपिटल गेन टैक्स लागू हो सकता है, भले ही आपको कैश न मिला हो. खासकर पुराने या पुश्तैनी गहनों में खरीद कीमत और रिकॉर्ड न होने से परेशानी बढ़ सकती है.
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