भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बढती चुनौतियों से कारगर रूप से निपटने के लिए क्षेत्र में हरित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि सीमा पार व्यापार में रूपये से भुगतान और भविष्य में सैन्ट्रल बैंक डिजिटल करेंसी अधिक सहयोग के क्षेत्र भी हो सकते हैं।
आज नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि दक्षिण एशिया क्षेत्र अपनी अधिक जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों के नुकसान के कारण जलवायु परिवर्तन के लिए हानिकारक है। उन्होंने यह भी कहा कि तेज गति से वाजिब लागत पर हरित गति की दिशा में बढने के लिए दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया है, क्योंकि दक्षिण एशियाई देशों में जीवाष्म ईंधन पर अधिक निर्भरता है।
क्षेत्र के समक्ष विभिन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि ये चुनौतियां कोविड महामारी, रूस यूक्रेन युद्ध के दुष्प्रभाव, मुद्रास्फीति और विश्व भर में वित्तीय बाजार के जटिल होने से उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति और बाहरी ऋण कठिनाइयों से निपटने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न उपायों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारतीय मुद्रा कोष के विश्व आर्थिक आउटलुक के अनुसार भारत, बंगलादेश और मालद्वीव 2022 और 2023 में विश्व में तेजी से बढने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एशियाई विकास बैंक के दिसम्बर 2022 के आउटलुक के अनुसार दक्षिण एशिया क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद 2022 में छह दशमलव पांच प्रतिशत और 2023 में छह दशमलव तीन प्रतिशत बढने का अनुमान है। श्री दास ने कहा कि विश्व बैंक ने यह भी अनुमान लगाया है कि क्षेत्र के सभी देशों के लिए निश्चित रूप से विजय की स्थिति बन सकती है।